Rapid Study: कोरोना की दूसरी लहर का महिलाओं और बच्चों पर पड़ा सबसे बुरा असर

महज सात फीसदी बच्चे कर पा रहे आन लाइन क्लास: EKA Rapid Study एका की कानूनी सहायता ईकाई परवाज ने किया कोरोना लॉकडाउन पर त्वरित अध्ययन शहरी गरीबों पर किए … Read More

Vaccination: व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के फर्जी ज्ञान से बचें और टीका जरूर लगवाएं

सायरा खान Vaccination: कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए मास्क लगाना और हाथ धोने जैसे काम किए जा रहे हैं। वैज्ञानिकों और डॉक्टरों ने बार-बार इसकी जरूरत बताई है। कोरोना … Read More

Lockdown: लॉकडाउन के साइड इफेक्टः घर की छोटी बातें बन रही हैं बड़ी समस्या

प्रदीप सिंह Side effects of Lockdown: सिकंदराबाद गांव की बानो बी के परिवार में सात लोग हैं। इनमें दो बहुएं, दो लड़कियां और तीन लड़के हैं। लड़कों के काम-धंधे बंद … Read More

Mobile Vendors: मोबाइल कारीगरों के लिए अजाब बना लॉकडाउन

अब्दुल हक़ उर्फ अब्दुल्ला (कोरोना महामारी के बीच मोबाइल का महत्व और ज्यादा बढ़ गया है। इससे न सिर्फ बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं, बल्कि बीमार होने पर सहायता … Read More

Theatre: कोविड काल में रंगकर्मियों के हाथों से छूटा ‘रंग’

(Theatre in Lockdown: कोविड काल बीते साल में सबसे अधिक इस्तेमाल हुए शब्दों में शामिल है। इस शब्द में छुपी तकलीफ को समाज के कई तबकों ने महसूस किया है। … Read More

Covid Tales: ‘शहरों को सुंदर बनाता हूं और अकसर भूखे सो जाता हूं’

सायरा खान मेरा नाम रमेश है। मैं मजदूर हूं और मजबूर हूं। मैं ग्राम ब्यावरा का रहने वाला हूं। मेरे परिवार में हम पांच भाई, दो बहने हैं। रमेश का … Read More

Covid Tales: ‘गुजारा करने के लिए सब्जी बेचते हैं तो पुलिस-प्रशासन के लोग करते हैं लूट-खसोट’

प्रदीप सिंह, परवाज टीम  Covid Tales: आज मेरे पास रोशनपुरा न्यू मार्केट से मीरा (बदला हुआ नाम) का फोन आया। उनके परिवार में कमाने वाली वही हैं और साथ में … Read More

Covid Tales: घर में बंद बच्चों के साथ बढ़ रही है हिंसा

सायरा खान Covid Tales: शहर की आवासीय मल्टीया और उसमें रहने वाले लोग। मल्टी में बने छोटे-छोटे कमरे, जिसमें एक परिवार को रहने के लिए जगह पूरी नहीं पड़ती है। … Read More

Covid Tales: शहरों को चमकाने वाले मजदूरों के हिस्से से जीने-खाने का मौका भी छिना

निगहत खान मजदूर ही शहरों को चमकाते हैं, लेकिन इनकी जिंदगी अंधेरे में घुट-घुटकर खत्म हो जाती है। न इनके काम को सम्मान मिलता है और न ही मेहनत के … Read More