Fascism

Ram Puniyani: फासीवाद के खिलाफ व्यापक एकता वक्त की जरूरत: प्रो राम पुनियानी

(आज 12 नवंबर को आईआईटी मुंबई के पूर्व प्रोफेसर और प्रख्यात लेखक राम पुनियानी (Ram Puniyani) भोपाल में थे। मूलतः एक्शन ऐड के कार्यक्रम में शामिल होने मुंबई से हवाई यात्रा करके भोपाल पहुंचे राम पुनियानी का सांप्रादायिकता के खिलाफ लंबा काम रहा है। भोपाल में उनके काम की इज्जत करने वालों की लंबी फेहरिस्त है। इन्हीं साथियों से संवाद के लिए मध्य प्रदेश लोकतांत्रिक अधिकार मंच (MPDRF) की ओर से गांधी भवन में “फ़ासीवादी दौर में प्रतिरोध” विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। हालांकि इस व्याख्यान के शुरू होने से पहले गांधी भवन की ओर से कार्यक्रम न करने की अपील भी की गई। बताया गया कि प्रशासन की ओर से दबाव है कि यह कार्यक्रम आयोजित न किया जाए। आखिर में जब आयोजकों ने कहा कि आप कार्यक्रम नहीं करने देंगे तो हम यहीं गांधी भवन के गेट पर धरना देंगे, तब जैसे तैसे आयोजन की स्थिति बनी। यह सब तथ्य इसलिए ताकि समझा जा सके कि शहर भोपाल में एक सामान्य गोष्ठी, सेमिनार, व्याख्यान करना कितना मुश्किल और दुरूह होता जा रहा है। बहरहाल, इस कार्यक्रम की पारंपरिक रिपोर्टिंग, जिसे उपलब्ध कराया है साथी अब्दुल हक ने…)

“फ़ासीवादी दौर में प्रतिरोध” विषय पर परिचर्चा का आयोजन

भोपाल, 12 नवंबर। मध्य प्रदेश लोकतांत्रिक अधिकार मंच (MPDRF) की ओर से शुक्रवार को भोपाल के गांधी भवन में “फ़ासीवादी दौर में प्रतिरोध” विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। परिचर्चा को मुंबई से आये सुप्रसिद्ध लेखक, धर्मनिरपेक्षता व साझी सांस्कृतिक विरासत के प्रमुख हस्ताक्षर प्रोफेसर राम पुनियानी ने संबोधित किया।

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परिचर्चा में अपनी बात रखते हुए प्रो राम पुनियानी ने कहा कि भाजपा की मोदी सरकार लगभग सभी लोकतांत्रिक संस्थानों को ख़त्म करने पर अमादा है। कला, साहित्य, संस्कृति, शिक्षा और इतिहास का भगवाकरण किया जा रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के निर्देश से भाजपा स्वतंत्रता आंदोलन में पैदा हुए समता, समानता, स्वतंत्रता, बंधुत्व और धर्मनिरपेक्षता के मूल्यों व साझी शहादत- साझी विरासत के गौरवशाली इतिहास को विकृत करते हुए भारतीय संविधान को बदलना चाहती है। उन्होंने बिखरते भारतीय लोकतंत्र और उभरते हुये फ़ासीवाद पर चिंता ज़ाहिर करते हुए वंचित-शोषित वर्गों की एकता पर जोर दिया और कहा कि कार्पोरेट पूँजी और मनुवाद-ब्राह्मणवाद के गठजोड़ से पैदा हुए मौजूदा संघी फ़ासीवाद को व्यापक एकता के बलबूते ही उखाड़ फेंका जा सकता है। यह आज वक्त की जरूरत है।

परिचर्चा की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार और लेखक लज्जाशंकर हरदेनिया ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि मध्यप्रदेश में कोविड-19 की आड़ में जनता के सारे लोकतांत्रिक और नागरिक अधिकारों को लगभग छीन लिए गए हैं। धरना, प्रदर्शन, आंदोलन करने पर गंभीर धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश में किसान आंदोलन खड़ा ना हो सके इसलिए किसान नेताओं पर मुकदमे दर्ज किए गए हैं। प्रदेश में बेरोजगारों द्वारा रोजगार की मांग करने पर उन्हे लाठियों से पीटा गया। इंदौर में तो पीड़ित मुस्लिम युवक के पक्ष मे खड़े होने पर कई लोगों पर जिलाबदर की एकतरफा कार्यवाही की गई है। ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे प्रदेश में संविधान और कानून का राज खत्म हो चुका है। आरएसएस–भाजपा की सरकार ने तमाम ब्रांहणवादी–मनुवादी सांप्रदायिक ताकतों को वंचित शोषित तबकों के ऊपर हिंसा और अत्याचार करने की खुली छूट दे दी है।

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सीपीआई (एमएल) रेडस्टार के प्रदेश सचिव के विजय कुमार ने परिचर्चा का संचालन किया। परिचर्चा में दलित, आदिवासी, पिछड़ों, महिला और अल्पसंख्यक समूहों का प्रतिनिधित्व करने वाले विभिन्न संगठन और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों तथा आमजनों ने भाग लिया।

अंत मे वंचित-शोषित तबकों के ऊपर हो रही राजकीय हिंसा और दमन के खिलाफ जनमानस तैयार करते हुए सयुंक्त प्रतिरोध के हुए साझा मंच, मध्यप्रदेश लोकतान्त्रिक अधिकार मंच (MPDRF) को मज़बूत करने का आह्वान किया गया।