13 सूत्री मांगों के साथ एक बार फिर दिल्ली की सरहदों पर किसानों की लामबंदी

16 फरवरी से बड़े किसान आंदोलन की तैयारी, देशभर में होंगे विरोध प्रदर्शन
भूमि अधिकार आंदोलन के तहत भाजपा—कार्पोरेट के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान


नई दिल्ली/ भोपाल। जैसे जैसे लोकसभा चुनाव की तारीखें नजदीक आ रही हैं, वैसे वैसे राजनीतिक मुद्दों के साथ विभिन्न समूह भी अपनी अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करने की तैयारी में जुटने लगे हैं। इसी क्रम में 16 फरवरी के बाद देश की राजनीति की केंद्रीय बहस को बदलने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए देशभर के किसान संगठन छोटी बैठकों और रणनीतिक तैयारियों में जुटे हुए हैं। भोपाल, लखनउ, जयपुर, समेत देश के अन्य हिस्सों से मिल रही खबरों के मुताबिक संयुक्त किसान मोर्चा और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की ओर से देशभर के किसान और मजदूर 16 फरवरी को एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। इसके लिए संयुक्त किसान मोर्चा और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने लोकतंत्र की रक्षा और फासीवाद का खंडन करने का नारा दिया है। साथ ही कॉर्पोरेट-आरएसएस-भाजपा के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया है।

संयुक्त किसान मोर्चा और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों  ने अपने बयान में कॉरपोरेट और साम्प्रदायिक गठजोड़ की विनाशकारी, विभाजनकारी और सत्तावादी नीतियों के खिलाफ एकजुट होकर उठ खड़े होने का आह्वान करते हुए कहा है कि हमारे देश का भविष्य श्रमिकों, किसानों और आम लोगों के अधिकारों की हिमायत करने वाली नीतियों पर निर्भर है न की इन विभाजनकारी नीतियों के स्थान पर।

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जाहिर है कि आगामी चुनाव को देखते हुए एक व्यापक भाजपा विरोधी मोर्चे का स्वरूप तय करने में इस आंदोलन की बड़ी भूमिका हो सकती है। इसके लिए छोटी बैठकों और रणनीतिक एकजुटता का दौर फिलहाल जारी है। इस पूरे आंदोलन में फिलहाल समाजवादी, वामपंथी और गांधीवादी धड़े की मौजूदगी साफ तौर पर दिखाई दे रही है। हालांकि कांग्रेस ने इस आंदोलन से फिलहाल दूरी बना रखी है।

आंदोलन की प्रमुख मांगें

1. वनाधिकार अधिनियम की कमजोरियों को रोकते हुए वन अधिकार अधिनियम 2006 को सख्ती से लागू करें।
2. वन अधिकार अधिनियम 2006 और LARR अधिनियम 2013 को सख्ती से लागू करें।
3. जैव विविधता और वन संरक्षण अधिनियम में किये गए संशोधनों को रद्द करें।
4. “इंडियन फॉरेस्ट एक्ट, 1927” जैसे प्राचीन व निर्दयी कानून को समाप्त करें।
5. सभी फसलों के लिए MSP@C2+50% की गारंटी सुनिश्चित करें।
6. सभी श्रमिकों के लिए ₹26,000 मासिक न्यूनतम मजदूरी को सुनिश्चित करते हुए सुनियोजित करें।
7. छोटे और मध्यम किसान परिवारों के लिए व्यापक ऋण माफी प्रदान करें और किसान समृद्धि योजना को पूर्ण रूप से प्रभाव में लायें।
8. भारत में लागू 4 श्रम कोड यानि संहिताओं को निरस्त करें।
9. रोजगार गारंटी को मौलिक अधिकार के रूप में स्वीकार करें।
10. रेलवे, रक्षा, और बिजली सहित सभी सार्वजनिक क्षेत्रों की निजीकरण पर तुरंत रोक लगायें।
11. सरकारी नौकरियों में अनुबन्धित नौकरियों को समाप्त करें।
12. मनरेगा योजना (MGNREGS) को मजबूत करें: रोजगार के लिए 200 दिन और ₹600/- दैनिक मजदूरी की गारंटी दें।
13. पुराने पेंशन योजना को पुनः स्थापित करें और लागू करें।

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भूमि अधिकार आंदोलन की ओर से हन्नान मोल्लाह, प्रेम सिंह घेलावत, सत्यवन, अशोक चौधरी, रोमा, विजू कृष्णन, कृष्ण प्रसाद, संजीव कुमार, उल्का महाजन, मेधा पाटकर और डॉ. सुनीलम ने कहा है कि हम सभी को श्रमिक विरोधी, किसान विरोधी, और जन विरोधी वर्तमान सरकार, जो कि आज विधिक ढांचे के पीछे छिपी है, को सामूहिकता का प्रदर्शन करते हुए उखाड़ फेंकने की ज़रूरत है। हमें फासीवाद और कॉर्पोरेट समर्थक आरएसएस-भाजपा नेतृत्व वाली एनडीए गठबंधन सरकार के खिलाफ एकजुटता से उठ खड़ा होना होगा।

क्या क्या होगा प्रदर्शन के दौरान
आंदोलन की रणनीति में वन शोषण के खिलाफ और वन संसाधनों के शोषण और आदिवासी समुदायों के विस्थापन का मुद्दा उठाया जाएगा। साथ ही वन संरक्षण अधिनियम 1980 में 2023 में किये गए संशोधनों का बहिस्कार करते हुए वन अधिकार अधिनियम 2006 की वकालत की जाएगी। इस दौरान आदिवासी, किसान, श्रमिक एकता को मजबूत किया जाएगा।