“लॉकडाउन लगते ही सरकार से लेकर कारोबारी तक लूट लेना चाहते हैं गरीबों को!”

“लॉकडाउन लगते ही सरकार से लेकर कारोबारी तक लूट लेना चाहते हैं गरीबों को!”

सायरा खान

बात पिछले साल की है। जब लॉकडाउन लगा था और काम बंद हो जाने की वजह से बड़ी संख्या में मजदूर घरों को लौटने के लिए मजबूर हो गए थे। उन्हें कोई साधन न मिलने की वजह से वह पैदल ही अपने घरों की तरफ लौट पड़े थे। इस बात भी जब मध्य प्रदेश में लॉकडाउन का एलान हुआ तो लोग सहम गए और घरों की तरफ वापसी को मजबूर हुए। ऐसे मजबूर मजदूरों की कहानी-

28 साल के एक युवक ने बताया कि वह इंदौर में एक बेकरी पर काम करते हैं। लॉकडाउन लग जाने के कारण वह फंस गए और घर नहीं लौट सके। उन्होंने सोचा कुछ दिन का लॉकडाउन है, खुल जाने पर घर लौट चलेंगे। कुछ दिन के बाद खबर आई कि लॉकडाउन बढ़ गया है।

उन्होंने बताया, “मैंने सोचा, घर जाना ही ठीक रहेगा पता नहीं क्या स्थिति बनती है। यह सोचकर मैं रेलवे स्टेशन पर टिकट लेने गया तो पता चला कि तत्काल में कोई टिकट नहीं है। रिजर्वेशन करवाना पड़ेगा। कंफर्म होने पर ही सीट मिल पाएगी, क्योंकि कोविड-19 चल रहा है, जिसके कारण बहुत लोग सफर कर रहे हैं और सीमित ट्रेनें चल रही हैं। यही वजह है कि कोविड-19 संक्रमण को देखते हुए ट्रेनों का किराया बढ़ा दिया गया है। जो टिकट पहले 395 रुपये में मिलता था वह अब 415 रुपये में मिल रहा है। इसकी वजह से लोगों को आने-जाने में परेशानी हो रही है।”

यह भी पढ़ें:  Mobile Vendors: मोबाइल कारीगरों के लिए अजाब बना लॉकडाउन

उन्होंने कहा कि इस समय हम मजदूर वर्ग के लोग ज्यादा परेशान हो रहे हैं, क्योंकि हमारे पास इतना पैसा नहीं होता कि हम इतना महंगी टिकट खरीद सकें। एक तो समय पर ट्रेन नहीं चल रही है। और जो चल रही है, उनका किराया बढ़ा दिया गया है। ट्रेन के लिए स्टेशन पर घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। अब हम मजदूर वर्ग के लोग सफर कैसे करें।

उन्होंने कहा, “मैं पांच दिन तक परेशान रहा। बड़ी मुश्किल से मैं अपने घर पहुंच पाया। कोरोना के नाम पर हर तरफ कालाबाजारी हो रही है। चाहे खाने-पीने की चीजें हों, दवाइयां हों या किराया, हर तरफ लूटपाट मची हुई है।”

यह भी पढ़ें:  Ensuring Access to Food for the Poorest

उन्होंने कहा कि काम की कमी होने के कारण ही हम दूसरे शहर में जाते हैं, ताकि हम अपने परिवार का पालन पोषण कर सकें, लेकिन प्रतिदिन महंगाई बढ़ती जा रही है। हम दो वक्त के खाने के लिए दर-दर भटकते हैं। आप बताइए हम लोग इतना महंगा किराया कहां से लाएं। इसमें कोई शक नहीं कि कोविड-19 के नाम पर आप जनता को ठगा जा रहा है। जबकि कोविड-19 की भयानक स्थिति से सब लोग भलीभांति परिचित हैं। पर प्रशासन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।

उन्होंने कहा कि चारों तरफ लाशों का ढेर लगा हुआ है। अभी भी बहुत से मजदूर दूसरी जगह पर फंसे हुए हैं। घर नहीं पहुंचे हैं। इस ओर सरकार का ध्यान बिल्कुल नहीं है। होना तो यह चाहिए था कि इस मुश्किल घड़ी में कुछ निशुल्क ट्रेनों का संचालन कर देती, जिससे लोग अपने घर पहुंच सकते। और कोविड-19 के संक्रमण से बच सकते, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो रहा है। पता नहीं हमारी सरकार का ध्यान इस ओर कब जाएगा।