Bhagat Singh: भगतसिंह के विचारों की रोशनी में देश के हालात देखा, परखा और समझा 

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Bhagat SinghBhagat Singh: शहादत दिवस पर वैचारिक संगठनों, संस्थाओं और जन समूहों ने जगह-जगह कार्यक्रम आयोजित किये

प्रभात फेरी, वैचारिक गोष्ठी और परिचर्चा आयोजित कर शहीदों को दी श्रद्धांजलि

 

भोपाल। (Bhagat Singh) शहीदे-आजम भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरु के शहादत दिवस पर देश भर में कार्यक्रम आयोजित किये गए। मध्यप्रदेश की बात करें तो राजधानी भोपाल से लेकर प्रदेश के हर जिले में अमर शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई । तमाम वैचारिक संगठनों, संस्थाओं, जन समूहों व राजनीतिक दलों ने अपने-अपने तरीके से क्रांतिकारियों की शहादत को याद किया। सोशल मीडिया जहां भगत सिंह (Bhagat Singh) के विचारों और उनकी व उनके दोनों साथियों की तस्वीरों से पटा पड़ा रहा, वहीँ कोरोना से राहत के बाद भौतिक रूप से उपस्थित होकर लोगों ने शहादत दिवस मनाया। शहीदों की तस्वीर और मूर्तियों पर फूल-माला चढ़ाकर, भले ही महापुरुषों के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने का एक नैतिक तरीका माना जाता हो, लेकिन इतना भर महज़ एक औपचारिक रस्म अदायगी बनकर रह जाता है, वहीँ उनकी याद में उनके विचारों और जीवन के बारे में चर्चा करना स्मृति में उनकी याद संजोने और प्रेरणा ग्रहण करने का मजबूत आधार होता है।  इसी क्रम में सरदार भगत सिंह के समर्पण, त्याग और उनकी गहरी वैचारिक समझ से प्रेरणा ग्रहण करते हुए विभिन्न समूहों द्वारा संवाद, परिचर्चा व गोष्ठी का आयोजन किया गया।

भोपाल के सांस्कृतिक, सामाजिक संगठनों, समूहों की सामूहिक पहल पर मोहनिया कक्ष, गांधी भवन में शहीदों को याद करते हुए कार्यक्रम का आयोजन किया गया।  कार्यक्रम में (Bhagat Singh) ‘भगतसिंह – आज’ विषय पर सक्रिय सांस्कृतिक आंदोलनकारी शम्सुल इस्लाम ने उपस्थित जनसमूह के साथ संवाद किया। आयोजकों का कहना है कि बदलते वक्त के साथ-साथ यह ज़रुरत बढ़ती गयी है, कि शहीद भगतसिंह के जीवन और विचारों की रोशनी में देश की राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों को देखा, परखा, समझा जाए। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्याम बोहरे ने की।

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भोपाल में ही भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की जिला परिषद् द्वारा ट्रांसपोर्ट हम्माल मजदूर सभा के कार्यालय (ट्रांसपोर्ट क्षेत्र) इतवारा में अमर शहीदों को याद करते हुए श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। पार्टी के जिला सचिव शैलेन्द्र शैली ने कहा कि फासीवाद के दौर में भगत सिंह (Bhagat Singh) के विचार हमें ताकत और प्रेरणा प्रदान करते हैं कि हम प्रतिरोध की आवाज को बुलंद रखेंगे और अंतिम साँस तक इस फासीवाद का मुकाबला करते रहेंगे, जब तक कि सही अर्थों में भगत सिंह के स्वप्नों का भारत नहीं बन जाता। सभा में उपस्थित अन्य लोगों ने भी शहीदों की शहादत को याद करते हुए अपनी बात रखी व इंकलाब जिंदाबाद का नारा बुलंद किया गया।

इंदौर जिले में प्रगतिशील लेखक संघ की स्थानीय इकाई के बैनर तले कॉमरेड भगत सिंह और उनके साथियों की शख़्सियत के विभिन्न पहलुओं परिचर्चा आयोजित की गई। प्रलेस सदस्य हरनाम सिंह चाँदवानी, विवेक मेहता और मुकेश पाटीदार भगत सिंह और उनके साथियों के अवदान पर अपने विचार रखते हुए, परिचर्चा की शुरुआत की। इस मौक़े पर प्रगतिशील लेखक संघ के राष्ट्रीय सचिव विनीत तिवारी ने हाल में दिवंगत हुए अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त मार्क्सवादी विद्वान प्रो. एजाज़ अहमद से जुड़ी यादों और उनके लेखन पर अपनी बातें रखी। परिचर्चा में प्रलेस के अलावा दूसरे सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग भी उपस्थित रहे।

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अशोकनगर जिले में शहीदे-आजम भगतसिंह, सुखदेव और  राजगुरु के शहादत दिवस पर इप्टा और प्रगतिशील लेखक संघ ने संयुक्त रूप से वैचारिक गोष्ठी का आयोजन कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। प्रारम्भ में कवि एवं  रंगकर्मी संजय माथुर ने भगतसिंह और उसके साथियों के दस्तावेजों में से एक महत्वपूर्ण आलेख ‘हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन का घोषणापत्र ‘ का वाचन किया। युवा कवि अभिषेक अंशु ने ” क्रांतिकारी आन्दोलन का वैचारिक पक्ष और भगतसिंह ”  विषय पर अपना आधार वक्तव्य दिया। इस विषय पर अरबाज, कुश कुमार, अनूप सरहिन्द, सुरेन्द्र रघुवंशी सहित सत्र की अध्यक्षता कर रहे चित्रकार पंकज दीक्षित ने विस्तारपूर्वक अपनी बात कही। उपस्थित युवाओं के हस्ताक्षेप ने गोष्ठी को बहुत विचारोत्तेजक बना दिया ।

इसी दिन क्रांतिकारी  कवि अवतार सिंह ‘ पाश ‘ का शहादत दिवस भी पड़ता है।  23 मार्च, 1988 को पंजाब में आतंकवादियों ने उनकी हत्या कर दी थी। पंकज दीक्षित, संजय माथुर और अभिषेक अंशु ने उनकी कुछ कविताओं का पाठ भी किया। सत्र के प्रारम्भ में इप्टा की साथी सत्यभामा ने शैलेन्द्र के चर्चित जनगीत ‘तू ज़िन्दा है तो ज़िंदगी की जीत पर यकीन कर’ की प्रस्तुति दी ।  गोष्ठी में डॉ. डी. एस. सन्धु,  रतनलाल, रामदुलारी शर्मा, सीमा राजोरिया, गिरिराज कुशवाह, हर्ष चौबे, विशाल, दर्श दुबे,  सत्तार खान, अफरोज, सौरभ झा, नित्या माथुर, कुश, दीपिका, सलोनी, कृष्णा बैरागी, सावन बैरागी, रामबाबू कुशवाह सहित अनेक संस्कृतिकर्मी, लेखक, कलाकर और युवा शामिल थे। गोष्ठी का संचालन हरिओम राजोरिया ने किया ।