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Police Atrocity: पीट पीट कर अधमरा किया, झूठा अपराध कायम कर जेल भेजा, जेल में मौत

Tasweer— तस्वीर

राजधानी भोपाल में पुलिस बर्रबता (police atrocity) की यह एक जीती-जागती कहानी है। थाने में कंजर समुदाय के व्यक्ति तुलसीराम को इस कदर पीटा गया कि बाद में उनकी मौत हो गई। परिवार वाले यह आरोप लगा रहे हैं और इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं। परिवार वालों का आरोप है कि पुलिस की पिटाई उनके सामने हुई और पुलिस ने तुलसीराम को छोड़ने के बदले पांच लाख रुपये की मांग की। पैसे न दे पाने की वजह से पुलिस ने पिटाई जारी रखी और बाद में तुलसीराम को जेल भेज दिया गया। वहां उनकी मौत हो गई। अब पुलिस-प्रशासन मामले को दबाने में लगा है।

तुलसीराम पिता नहार सिंह ग्राम ढेकपुर, बिजोरी टपरा, तहसील बैरसिया, भोपाल के रहने वाले थे। वह 25 मई 2021 को शादी का सामान खरीदने पत्नी और परिवार के और लोगों के साथ बुलेरो जीप से बैरसिया आए थे। वह बेरासिया के दशहरा मैदान की तरफ गए थे कि इतने में बेरसिया थाने की पुलिस आई और बुलेरो जीप और ड्राइवर तुलसी राम विजोरी को थाना लेकर आ गई। आरोप है कि थाने में पुलिस कर्मियों द्वारा तुलसीराम की बेहरहमी से पिटाई की गई। तुलसी राम की पत्नी भी वहीं थीं, जब तुलसी राम की पत्नी के सामने ही थाने में पदस्थ चार पुलिस कर्मी ने बर्बतापूर्वक पिटाई की। पत्नी, पतलेस बाई का कहना कि तुलसीराम और वो खुद पुलिसवालों के हाथ जोड़ते रहे कि उन्हें न मारें, लेकिन पुलिस ने एक न सुनी। उनका आरोप है कि पुलिस ने कहा कि तू पांच लाख रुपये ला, नहीं तो तेरे सामने ही मारेंगे।

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पत्नी के मुताबिक पुलिस वाले पूरी बर्बता से उनकी पिटाई कर रहे थे। कभी दीवार पर तुलसीराम का सर लड़ा रहे थे, तो कभी लात मार रहे थे। पत्नी ने बताया कि दो घंटे बाद धक्के देकर उनको थाने से बाहर निकाल दिया गया। वो खिड़की से पति के साथ हो रही क्रूर हिंसा देखती रहीं। वह गिड़गिड़ा रही थीं कि एक-दो लाख रुपये की बात हो तो वह दे दें, लेकिन इतनी जल्दी पांच लाख रुपये कहां से लाएंगी।

अगले दिन 26 मई 2021 को तुलसीराम के ऊपर झूठा आपराधिक प्रकरण कायम कर जेल भेज दिया गया। जेल से 29 मई 2021 के पत्र के माध्यम से परिवारजन को तुलसीराम की मौत की जानकारी दी गई। आज परिवार के लोग हमीदिया अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए पहुंचे और पुलिस बर्बता की घटना बयान की।

जेल के जानकारी पत्र में 29 मई 2021 के दिन उपचार के दौरान मृत्यु बताया जा रहा है, और साथ ही यह दर्ज किया गया है कि मानसिक स्वास्थ्य के परामर्श के लिए उन्हें हमीदिया चिकित्सालय भेजा जा रहा था, लेकिन हमीदिया में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

परिवार वालों का कहना है कि बेरासिया पुलिस की बर्बर हिंसा और उसके बाद जेल में उपयुक्त इलाज न मिलने की वजह से तुलसीराम की मौत हुई है। जेल के पत्र में ही जिस दिन से वो भर्ती हैं, उसके अगले दिन से ही स्वास्थ्य की गिरावट समझ आ रही है।

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परिवार का आरोप है कि बेरासिया पुलिस की हिंसा और भोपाल केन्द्रीय जेल की लापरवाही से तुलसीराम की मौत हुई है। उनकी मांग है कि पुलिस पिटाई और लापरवाही के लिए हत्या का मुकदमा दर्ज होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह मौत, जेल में होने के नाते, मजिसट्रेट की जांच का मामला बनता है। पोस्टमार्टम के दौरान परिवार से शुरुआती बयान लिया गया है। तुलसीराम के पीछे उनकी पत्नी और चार बच्चे हैं। घटना के लिए जिम्मदार पुलिस वालों पर कार्रवाई होगी और परिवार का भविष्य कैसा होगा, यह अहम सवाल हैं।

तुलसीराम कंजर समुदाय के सदस्य थे। बेरासिया के लोगों का आरोप है कि कंजर समुदाय के युवा, औरतें, बच्चे सभी इस खौफ में रहते हैं कि जब वे राशन लेने, त्यौहार मनाने या छोटी बाज़ार में निकले तो उन्हें बेरासिया थाने की पुलिस कभी भी उठाकर पैसे ऐंठने का काम करती है। पुलिस पर आरोप है कि लोगों से अब 20,000 से ज़्यादा लाखों रुपये तक की मांग की जाने लगी है। नहीं दे पाने पर कच्ची दारु का केस इन पर ठोंकना आम बात है।