Covid Tales

Covid Tales: तंगहाली से परेशान पति रात में चुपचाप छोड़ गया बीवी-बच्चों को

सायरा खान

लॉकडाउन ने आर्थिक तौर पर बदहाल लोगों की जिंदगी में कड़वाहट भर दी है। इसने रिश्तों के ताने-बाने को भी तहस-नहस कर दिया है। यह कहानी एक ऐसे ही परिवार की है, जिस पर यकीन करना मुश्किल है। आर्थिक तंगी से परेशान एक पति ने न सिर्फ बीवी को छोड़ दिया बल्कि अपने जिगर के टुकड़ों को भी छोड़कर चुपचाप चला गया। बुरे हालात में पैदा हुई यह दास्तान आपको दुखों से भर देगी…

एक महिला परिवार के साथ करोंद पर किराए के घर में रहती हैं। उनके पति मजदूरी करते हैं। तीन बेटी और एक लड़का है। महिला ने बताया, “13 अप्रैल को जब लॉकडाउन लगा, तो उसी दिन से पति परेशान थे। घर पर खाने का कुछ सामान खरीद कर रख दिया था, ताकि घर का खर्च चल सके। 20 अप्रैल को खबर आई कि लॉकडाउन बढ़ गया है। यह सुनकर पति की परेशानी बढ़ गई। घर कैसे चलेगा, इसकी चिंता सताने लगी। किराया कहां से दूंगा? बच्चों को क्या खिलाऊंगा? काम कहां करूंगा? कहां से पैसा आएगा? इस समय कोई उधार भी नहीं देगा। अब तो मरने की नौबत आ गई है। वह बार-बार यही कह रहे थे।”

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महिला ने बताया, रात में सब ने साथ खाना खाया। सब के सो जाने के बाद रात में अचानक वह कहीं चले गए। पत्नी की नींद रात तीन बजे खुली, तो उसने देखा कि पति घर पर नहीं हैं। वह घबरा गई। दरवाजा खुला हुआ था। उसने अपने 10 साल के बेटे को जगाया। उसके कहा कि आगे गली में देख कर आओ। क्या तुम्हारे पिता वहां पर खड़े हैं?

बेटे ने आसपास के इलाके में पिता को काफी देर ढूंढा लेकिन वह नहीं मिले। बेटे ने जब लौटकर बताया तो महिला के पैरों तले जमीन सरक गई। मां जोर-जोर से रोने लगीं। बच्चे भी सहमे हुए थे। उन्हें मां ने बताया कि उनके पिता घर छोड़कर कहीं चले गए हैं तो वह भी रोने लगे। उनका फोन भी बंद था। इतनी रात में पता नहीं कहां चले गए। महिला के मुझे समझ नहीं आ रहा था।

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सुबह महिला ने अपने परिचितों, रिश्तेदारों, पति के दोस्तों से पूछा। जवाब मिला, हमें नहीं पता… हमारी तो बात भी नहीं हुई है कई दिन से। महिला ने एवं उनके रिश्तेदारों ने हर जगह उसे ढूंढा, लेकिन पति नहीं मिला ना ही उसकी कोई खबर मिली। हताश होकर वह वापस घर आ गई।

इस महामारी ने सब को निचोड़ कर रख दिया है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि लोग अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हैं। मानो जैसे इंसानियत खत्म हो गई हो। आज हम जिस समाज में रह रहे हैं। वह भी मुसीबत में साथ नहीं देता।

लॉकडाउन लगाने से इस महामारी से छुटकारा तो मिल जाएगा, लेकिन उससे पहले परिवार उजड़ चुके होंगे। भूख और बदहाली उन्हें तबाह कर चुकी होगी। घर उजड़ जाएंगे। परिवार सड़क पर आ जाएंगे। बच्चे अनाथ हो जाएंगे। आखिर कब तक चलता रहेगा।