Parwaaz Helpline

Parwaaz Helpline: लॉकडाउन से 80 प्रतिशत परिवारों को राशन की किल्लत

महिला—बच्चों पर हिंसा के मामले हैं, लेकिन नहीं हो पा रही प्राथमिकी

परवाज की हेल्पलाइन में समस्याएं बता रहे लोगों को नहीं है लॉकडाउन और कोविड नियमों की सही जानकारी

भोपाल। लॉकडाउन के दौरान लोगों को खाने पीने की समस्या सबसे ज्यादा है। ऐशबाग बस्ती को एक सैंपल मानें तो 80 प्रतिशत लोगों को राशन की किल्लत हो रही है। साथ ही कोविड काल में महिला और बच्चों पर हिंसा के मामलों में इजाफा हुआ है, लेकिन मामाले प्राथमिकी में तब्दील नहीं हो रहे हैं। यह तथ्य एका ट्रस्ट की लीगल ईकाई परवाज़ के साथियों से बातचीत में सामने आए। एका ट्रस्ट की परवाज ईकाई ने भोपाल की बस्तियों में अपनी हेल्प लाइन परवाज़ सलाह केंद्र की शुरुआत की है। इस हेल्पलाइन के जरिये रोज़ ही परवाज़ के वालेंटियर 50 से 60 लोगों से बात कर उनकी समस्या को संबंधित लोगों तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं।

इस पहल के बारे में परवाज सलाह केंद्र के अब्दुल हक ने बताया कि इस हेल्पलाइन का उद्देश्य लोगों को उनके घरों में ही स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देना है। हिंसा से पीड़ित महिलाओं की मदद के लिए कानूनी सलाह देना और कोविड के दौरान आ रही समस्याओं को जानकार उनके हल की दिशा में काम करना है। उन्होंने बताया कि कोविड के दौरान जानकारियों तक लोगों की पहुंच कम हुई है, इसलिए कोविड और अन्य कानूनी जानकारी देने का काम परवाज के साथियों ने अपने जिम्मे लिया है।

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सायरा ने बताया कि वो स्वास्थ्य संबंधी जानकारी में आम तौर पर मौसमी बीमारी के बारे में तो जानकारी देंगी ही, साथ ही कोविड 19 को लेकर जो भी प्रारम्भिक जानकारी है वो देने का काम कर रही हैं। कोविड 19 के पाज़िटिव मरीजों के लिए कोविड अस्पतालों का ब्यौरा, ऑक्सीजन बैंक और ऑक्सीजन रिफलिंग स्पॉट एवं कोविड केयर सेंटर से जुड़े हुए डॉक्टर से बात करा रही हैं।

परवाज़ में कानूनी सलाह देने वाले एडवोकेट प्रदीप का कहना है कि बस्तियों में ही नहीं कॉलोनियों में भी महिलाओं एवं बच्चों के साथ हिंसा के मामले हो रहे हैं। लॉकडाउन की वजह से वह प्राथमिकी तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। हमारी हेल्पलाइन उन महिलाओं और बच्चों को कानूनी मदद देने का काम कर रही है।

हेल्पलाइन की एक और साथी अमरीन का कहना है कि दिन में उनके पास 80 प्रतिशत फ़ोन सिर्फ आर्थिक तंगी के आ रहे हैं। आम तौर पर खाने को लेकर तीन बहुत बड़ी समस्या है-
1. राशन कार्ड पर मिलने वाला सामान भूख मिटाने के लिए काफी नहीं है।
2. राशन की दूकान पर जाने के लिये पुलिस के डंडे खाने पड़ते हैं।
3. जिनका राशन कार्ड दूसरी जगह का है, वो वहां पहुंच नहीं पा रहे हैं और जिस जगह रहते हैं वो राशन वाला राशन नहीं दे रहा है।
4. जिनके पास राशन कार्ड नहीं है, उनको राशन नहीं मिल रहा है।
5. छात्र जो दूसरे राज्य एवं प्रदेश के हैं उसके पास राशन कार्ड की कोई व्यवस्था नहीं है।

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लोगों को खाने के सामान की दिक्कत आ रही है तो किराए के मकान में रहने वालों को मकान मालिक किराए को लेकर तंग करने लगे हैं। परवाज़ हेल्पलाइन पर एक सब्ज़ी के ठेले वाले ने बताया कि प्रशासन कहता है कि सब्जी आवश्यक वस्तु में आती है, इसलिए उसको लॉकडाउन में छूट मिली हुई है, फिर भी पुलिस वाले आकर बार बार धमकाते हैं।

परवाज हेल्पलाइन की आगामी योजनाओं के बारे में बताया गया कि बहुत जल्द बच्चों के साथ भी अलग से बातचीत कर उनकी समस्या को प्रशासन तक पहुंचाने का काम किया जाएगा।