सेलिब्रेशन आॅफ जर्नलिज्म: ब्रिटिश फोन हैकिंग विवाद – मीडिया समूह ने भुगता निजता में दखल देने का खामियाजा

12 सितंबर 2016 को राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित

सचिन श्रीवास्तव 

14 नवंबर 2005 को ब्रिटिश अखबार “न्यूज ऑफ द वर्ल्ड” ने एक खबर प्रकाशित की कि प्रिंस विलियम एक पोर्टेबल एडिटिंग सूइट खरीदने वाले हैं। यह खबर रॉयल फैमिली की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार क्लाइव गुडमन की थी। मीडिया मुगल रूपर्ट मर्डोक की न्यूज कॉर्पोरेशन के अखबार “न्यूज ऑफ द वर्ल्ड” में इससे पहले प्रिंस की घुटने की चोट के बारे में खबर प्रकाशित हुई थी, जिसकी जानकारी महज उनके डॉक्टर को थी। शिकायत के बाद पुलिस ने जांच शुरू की, लेकिन मामला दबा दिया गया। इसके बाद ब्रिटेन के अन्य अखबारों ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया और एक बड़े स्कैंडल का खुलासा हुआ।

प्रिंस विलियम और उनके भाई हैरी की फोन टैपिंग की शिकायत से यह मामला शुरू हुआ। पुलिस जांच के दौरान न्यूज ऑफ द वर्ल्ड के रॉयल रिपोर्टर क्लाइव गुडमन और निजी जासूस ग्लेन मलकैयर को गिरफ्तार किया गया। उन पर लगे आरोप साबित हो गए। मामले में 2007 में अखबार के संपादक एंडी कोल्सन ने इस्तीफा दिया, लेकिन इससे इनकार किया कि उन्हें हैकिंग की जानकारी थी। बाद में कोल्सन को ब्रिटेन की कंजरवेटिव पार्टी का मीडिया प्रमुख बनाया गया। तब पार्टी विपक्ष में थी। “न्यूज ऑफ द वर्ल्ड” के वरिष्ठ संपादक इयान एडमंडसन को निलंबित किया गया। अभिनेत्री सिएना मिलर ने मामले में एडमंडसन का नाम लिया था।

यह भी पढ़ें:  "एवेंजर्स: एंडगेम" की सफलता उर्फ हर वक्त में बाजार अपना रास्ता निकाल लेता है

चार साल बाद फिर उठा विवाद
जुलाई 2009 में गार्डियन अखबार ने लिखा कि न्यूज कॉर्प की ब्रिटिश शाखा न्यूज इंटरनेशनल ने फोन हैकिंग का मामला दबाने के लिए दस लाख पौंड की रिश्वत दी। गार्डियन के मुताबिक, फोन हैकिंग का शिकार और भी बहुत लोग हुए और इनमें पूर्व उप मुख्यमंत्री के अलावा और जाने माने लोग शामिल हैं। इस रिपोर्ट के बाद मामले की पुलिस जांच शुरू हुई।

संस्थान को थी जानकारी
फरवरी 2010 में आई एक सरकारी रिपोर्ट में कहा गया कि ऐसा हो ही नहीं सकता कि न्यूज ऑफ द वल्र्ड के प्रमुखों को फोन हैकिंग की जानकारी नहीं हो। सितबंर 2010 में न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा कि न्यूज ऑफ द वल्र्ड के कई पत्रकार जासूसी कर रहे थे जिसे संपादकों ने सहमति दी। इसके बाद पुलिस ने फिर सबूतों पर नजर डाली और कोल्सन से पूछताछ की लेकिन जांच नहीं की। तत्कालीन प्रधानमंत्री डेविड कैमरून ने मीडिया प्रमुख कोल्सन को नौकरी छोडऩे पर मजबूर किया।

पुलिस प्रमुख को भी देना पड़ा इस्तीफा
मामला सामने आने पर लंदन पुलिस पर इसे गंभीरता से न लेने का आरोप लगा। लंदन पुलिस ने इन खबरों का खंडन किया कि उसने मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया और जांच करने में देरी की।  पुलिस पर हैकिंग विवाद की जांच में पारदर्शिता न बरतने और मर्डोक के अखबार से पैसे लेने के आरोप भी लगे। इसके बाद ब्रिटेन के पुलिस प्रमुख सर पॉल स्टीफेंसन को भी इस्तीफा देना पड़ा।

यह भी पढ़ें:  पत्नी की हत्या के मामले में जज गिरफ्तार, मौके से मिला था रवनीत का रिवॉल्वर

अखबार हुआ बंद
विवाद के बाद ब्रिटेन के सबसे ज्यादा बिकने वाले टेब्लॉयड न्यूज ऑफ द वल्र्ड का प्रकाशन बंद कर दिया गया।

कई विदेशी फोन भी सुने
इसके फोन टैपिंग के तार अफ्रीका, अमरीका और यूरोप के कई देशों से जुड़े थे। अफगानिस्तान और ईराक में मारे गए ब्रिटिश सैनिक, एक अगवा किशोरी जिसकी बाद में हत्या कर दी गई और 11 सितंबर को अमेरिका पर हुए हमलों के पीडि़त भी इसके शिकार थे।

4000 से ज्यादा लोगों के फोन हैक किए थे “न्यूज ऑफ द वर्ल्ड” ने
14 लोगों का इस्तीफा हुआ जांच के दौरान
16 लोगों को गिरफ्तार किया गया मामले में
12 लोग पाए गए दोषी