शादी, ससुराल और मेरा सपना

शादी, ससुराल और मेरा सपना

आज मेरा 12वीं का रिज़ल्ट आने वाला है। मैं बहुत खुश हूं। अब मैं कॉलेज जाउंगी।कॉलेज जाना मेरा सपना था। थोड़ा डर भी लग रहा है। यही सब सोच रही थी कि हुमा चिल्लाते हुए आई और बोली— रूबा तुम पास हो गईं। उस वक़्त मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था। चेहरे पर हँसी, आँख में आंसू और दिल में हुमक कि अब कॉलेज जाऊंगी।

मैंने घर पर बात की कि मैं कॉलेज जाऊंगी और आगे और पढ़ाई करूंगी। लेकिन घर में सबने मना कर दिया। पापा ने भी मना कर दिया। कहा कि हमने तुम्हें 12वीं तक पढ़ा लिया। इतना बहुत है। हमारे घर में लड़कियां इतना नहीं पढ़तीं। तुम कॉलेज नहीं जाओगी। इस फरमान के बावजूद जैसे तैसे मैंने घर में लड़ाई करके कॉलेज में दाखिला ले लिया।

मैं अब कॉलेज भी जाने लगी। सब अच्छा खासा चल रहा था। मेरी परीक्षा आने वाली थी। मैं परीक्षा की तैयारी कर रही थी। अचानक मेरे चाचा आए। मेरा रिश्ता लेकर। और हमारे अम्मी पापा ने हमारा रिश्ता पक्का कर दिया। मुझसे पूछा भी नहीं। उन लोगों ने ही फैसला कर लिया कि एक महीने में शादी कर देंगे। मैंने बहुत मना किया। मुझे शादी नहीं करनी। अभी मुझे पढ़ना है। मैं अभी छोटी हूं। मेरी किसी ने नहीं सुनी। मैंने बहुत कोशिश की कि मैं ये शादी नहीं करूं। क्योंकि मुझे अभी पढ़ना था। मेरा सपना था कि में ट्रेन चलाउं।

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मैंने घर पर कहा कि अभी पढ़ रही हूं और मेरी 2 महीने बाद परीक्षा है। तो घर वालों ने कहा— हम लड़कों वालों से बात कर लेंगे। पापा ने लड़कों वालों से बात भी कर ली कि मैं आगे और पढ़ाई करूँगी। लड़के वाले पढ़ाने के लिए भी तैयार हो गए।

मेरी उम्र 17 साल थी और लड़के की 35 साल, लेकिन हमारी किसी ने नहीं सुनी। मेरी शादी करा दी। मेरी शादी तो कर दी लेकिन, बाद में ससुराल वाले मुझे पढ़ने लिखने के लिए मना करते रहते। और मेरी पढ़ाई का ज़िम्मेदारी भी नहीं उठाते। फिर बाद में हमारे घर वालों को पता चला कि लड़का कमाता नहीं है। मुझे परेशान रखता है। मैं शादी के 4 महीने बाद ही घर आ गई। मैं तीन महीनों से घर पर बैठी थी। मुझे मेरे पति लेने भी नहीं आया। ना ही कोई कॉल करता है। अगर मैं कॉल करती हूं तो मेरी आवाज़ सुनकर कॉल काट देता है।

हमारे चाचा ने ससुराल वालों से बात की। इसके बाद मेरा पति मुझे वापस लेने आया। अम्मी पापा से बोला अब मैं कमाने जाऊंगा और आपकी लड़की को भूखा नहीं रखूंगा। मैंने मना किया लेकिन हमारे घर वालों ने हमसे कहा चली जाओ। मैं ससुराल चली गई, लेकिन फिर से वही सब होने लगा था। हमारे अम्मी पापा फिर से घर पर ले आए हमें। और हमारी पढ़ाई का खर्चा हमारे अम्मी पापा ने उठाया।

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ऐसे करके मुझे 1 साल हो गया था घर बैठे-बैठे। फिर से हमारे चाया और हमारे ससुराल वाले हमें लेने आए। बोला कि अब हम आपकी लड़की को अच्छे से रखेंगे, और हमारे अम्मी पापा ससुराल भेजने के लिए तैयार हो गए। लेकिन मैंने मना कर दिया। मैं अब ससुराल नहीं जाऊंगी। ना ही मुझे अपने पति के साथ रहना है। मैंने ये फैसला लिया। पहले अम्मी पापा नहीं मान रहे थे। फिर बाद में मेरे अम्मी पापा ने साथ दिया।

मैं अब अपने अम्मी पापा के साथ अपने घर पर रहती हूं। अपनी पढ़ाई भी पूरी कर रही हूं। मैं जॉब भी करती हूं। मैं अपना और अपनी पढ़ाई का खर्चा खुद ही उठती हूं। अब मैं अपना सपना भी पूरा करूँगी।

फरहा