स्वाति मालीवाल: नियुक्ति के साथ ही शुरू हो गए थे विवाद

21 सितंबर 2016 को राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित

सचिन श्रीवास्तव 
जुलाई 2015 में राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष चुनी गईं स्वाति मालीवाल के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो यानी एसीबी ने प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। उनकी नियुक्ति के वक्त भाजपा ने आप सरकार पर भाईभतीजावाद का आरोप लगाया था, जबकि आप की ओर से सफाई दी गई थी कि स्वाति की नियुक्ति पूरी तरह से योग्यता के आधार पर की गई है।

स्वाति मालीवाल
जन्म: 15 अक्टूबर 1984
2002 में नोएडा से हायर सेकेंडरी की। जेएसएस अकेडमी ऑफ टेक्नीकल एजुकेशन से 2006 में बी. टेक.।

बरखा का दावा
आप के कई समर्थकों को डीसीडब्ल्यू में पद दिया गया है। ऐसे 85 लोगों के नाम सामने हैं। इन्हें ‘बिना अपेक्षित योग्यता’ के नौकरी दी गई है।
स्वाति की सफाई
गलत काम नहीं किया, तो भगवान से भी नहीं डरना चाहिए। सिस्टम बदलने के लिए काम करेंगे तो कुर्बानी तो देनी पड़ेगी। भर्ती का तरीका जो तरीका आयोग में सालों से अपनाया गया वही अपनाया है। जो बदला है वो है काम।

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क्या है मामला
दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष बरखा शुक्ला सिंह ने आयोग में गलत तरीके से 85 नियुक्तियों और गलत सैलरी की शिकायत की। सोमवार को एसीबी ने महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल से पूछताछ की। पूछताछ करीब 2 घंटे तक चली। एसीबी ने स्वाति से 27 सवालों के जवाब मांगे। कुछ अहम दस्तावेज भी जब्त किए।

पति नवीन जयहिंद भी जुड़े हैं आप से
स्वाति के पति नवीन जयहिंद आप के चर्चित नेताओं में शुमार हैं। उन्होंने 2014 में रोहतक से चुनाव भी लड़ा था। महिर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी से फिजिकल साइंस में पीएचडी नवीन ने 15 अगस्त 2006 को जयहिंद मोर्चा की स्थापना की। वे जन लोकपाल आंदोलन के समय से इंडिया अगेंस्ट करप्शन की कोर कमेटी के सदस्य हैं। उन्होंने सूचना अधिकार कानून के लिए भी जमीनी स्तर पर काम किया था। 16 अगस्त 2011 को अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल आदि के साथ नवीन को भी गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेजा गया था।

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जाति प्रथा के खिलाफ
नवीन अपने नाम के साथ जयहिंदी टाइटल लगाते हैं। वहीं स्वाति भी ट्विटर आदि सोशल साइट पर अकाउंट नाम में जयहिंद का ही इस्तेमाल करती हैं। दोनों का कहना है कि वे चाहते हैं कि भारत से जाति व्यवस्था का खात्मा हो। इसलिए वे अपने नाम के साथ जयहिंद लगाते हैं।