भारत बनेगा फिजिक्स के प्रयोगों का केंद्र, गुरुत्वीय तरंग का होगा अध्ययन

6 सितंबर 2016 के राजस्थान ​पत्रिका में प्रकाशित

सचिन श्रीवास्तव 
विभिन्न मोर्चों पर दुनिया से दो कदम आगे रहने की होड़ कर रहा हमारा देश अब जल्द ही फिजिक्स के प्रयोगों का केंद्र बनेगा। भारत सरकार ने गुरुत्वाकर्षण तरंगों पर अध्ययन करने के लिए विशाल प्रयोगशाला बनाने के लंबे समय से अटके प्रोजेक्ट को सैद्वांतिक सहमति करीब छह महीने पहले दे दी थी। अब इसे 201 मिलियन डॉलर (1347 करोड़ रुपए) का शुरुआती फंड भी उपलब्ध करा दिया गया है। भारत की यह लेसर इंटरफेरोमीटर गे्रविटेशनल-वेव ऑब्जर्वेट्री (लीगो) अमरीका और इटली के महत्वपूर्ण भौतिकी प्रयोगों का केंद्र होगी। साथ ही यहां स्वतंत्र शोध भी किए जाएंगे।

क्या होगा भारतीय केंद्र में
भारत की गुरुत्वीय तरंग प्रयोगशाला दुनियाभर की अन्य सात प्रयोगशालों के बीच कोऑर्डिनेशन का काम करेगी।
यह अंतरिक्ष में पैदा होने वाली गुरुत्वीय हलचलों पर नजर रखेगी।
आइंस्टीन के सिद्धांत को समझने और रोजमर्रा के जीवन में उसके उपयोग पर शोध करेगी।
गुरुत्वीय ऊर्जा को भविष्य में इंसान के काम लाने के प्रयोगों पर काम करेगी।
भौतिकी के अध्ययन के लिए दुनियाभर के वैज्ञानिकों को ट्रेनिंग दी जाएगी।

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छह महीने पहले मिली बड़ी सफलता
11 फरवरी 2016 को अमरीकी वैज्ञानिकों ने गुरुत्वाकर्षण तरंगों के संबंध में आइंस्टीन के सिद्धांत को सही पाया। 1915 में आइंस्टीन ने अपना सिद्धांत दिया। अमरीका की लीगो ऑब्जर्वेट्री के शोधकर्ताओं ने दो ब्लैक होल की टक्कर से निकलीं गुरुत्वाकर्षण तरंगों का पता लगाया। इसके बाद सरकार ने भारतीय केंद्र को सैद्धांतिक सहमति दी थी।

अभी कहां हो रहा है गुरुत्वीय प्रयोग 
1995 टामा300 जापान
1995 जीयो600 जर्मनी
2002 लीगो अमरीका
2003 मिनिग्रेल नीदरलैंड्स
2005 पल्सर टाइमिंग अरे ऑस्ट्रेलिया
2006 सीलियो जापान
2007 विर्गो इंटरफेरोमीटर इटली
2015 एडवांस लीगो अमरीका
2016 एडवांस विर्गो इटली
आइये समझें गुरुत्वीय तरंग को
आइंस्टीन के साधारण सापेक्षतावाद सिद्धांत के अनुसार, अंतरिक्ष और समय दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। इन्हें एक साथ काल-अंतराल या टाइम स्पेस कहते हैं। अमूमन हम गुरुत्वाकर्षण बल को एक आकर्षित करनेवाला या खींचने वाला बल मानते है। आइंस्टाइन के अनुसार गुरुत्वाकर्षण टाइम स्पेस को भी मोड़ देता है। उसे तहस-नहस भी कर सकता है।

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क्या करती हैं गुरुत्वीय तरंगें 
अंतरिक्ष एक चादर है। इसके चार आयाम हैं। तीन आयाम (लंबाई, चौड़ाई और गहराई) जबकि चौथा आयाम है समय। अभी सभी ग्रह, उपग्रह, तारे अपनी अपनी धुरी पर हैं या एक दूसरे का चक्कर लगा रहे हैं।
यानी फिलहाल अंतरिक्ष एक तनी हुई चादर के समान है। इस चादर के बीच एक भारी गेंद रखें तो एक झोल पैदा होगा। फिर चादर पर मौजूद अन्य छोटी-छोटी गेंदें इस झोल की वजह से गति हासिल कर लेंगी। यह गति अंतरिक्ष के संतुलन को बिगाड़ सकती है।

1347 करोड़ रुपए की लागत से स्थापित होगी गुरुत्वीय तरंगों पर अध्ययन के लिए लैब। 
6 अन्य देशों जापान, अमरीका, ऑस्ट्रेलिया, इटली, जर्मनी, नीदरलैंड्स की प्रयोगशालाओं का केंद्र होगी भारत की लीगो लैब।
2023 में काम करना शुरू कर देगा भारतीय केंद्र।
139 वैज्ञानिक काम कर रहे हैं फिलहाल भारतीय केंद्र में।