संभलिए जनाब, आप पर है डिजिटल किडनैपर की नजर बिटक्वाइन में मांगते हैं पैसा

23 अगस्त 2016 को राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित

सचिन श्रीवास्तव
तकनीक के खतरे: गैरकानूनी लेनदेन का कानूनी तरीका
तकनीक की दुनिया ने एक तरफ हमारे जीवन को आसान बनाया है, तो दूसरी तरफ मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं। ऐसी ही एक मुश्किल है डिजिटल किडनैपिंग। इसी से जुड़ी समस्या है बिटक्वाइन। यह अजूबे से शब्द जल्द ही हमारी बातचीत की प्रमुख चिंताओं में शुमार होने वाले हैं। इसकी शुरुआत हो भी चुकी है। बीते सप्ताह मोहाली में एक आयुर्वेदिक कंपनी और शैक्षणिक संस्था के प्रमुख ने डिजिटल किडनैपिंग की शिकायत दर्ज कराई है। कुछ दिनों पहले संस्था के कंप्यूटर को हैक किया गया और सारी जरूरी फाइलों को लॉक कर दिया गया। अब हैकर्स ने इन फाइलों के बदले 5 बिटक्वाइन की मांग की है। आइए जानते हैं बिटक्वाइन और डिजिटल किडनैपिंग के इस खतरे को…..

डिजिटल किडनैपिंग
डिजिटल किडनैपिंग एक तरह से आपकी वर्चुअल पहचान चुराना है। इसके तहत आपके कंप्यूटर का डेटा चोरी किया जाता है। या फिर फेसबुक, गूगल, या अन्य सोशल फोरम पर आपकी पहचान या आपके करीबियों की पहचान को चुरा लिया जाता है। जैसे यदि फेसबुक पर आपने अपने बच्चों के फोटो डाले हैं, तो कोई उन्हें डाउनलोड कर इस तरह इस्तेमाल कर सकता है, जैसे वे उसके अपने बच्चे हों। साथ ही आपकी पहचान को अपने लिए इस्तेमाल कर सकता है। एक फोरम पर आपकी पहचान मिटाने के बाद वह व्यक्ति अन्य फोरम पर भी आपके नाम का गलत इस्तेमाल कर सकता है। साथ ही उसके पास आपके कंप्यूटर का डेटा है, तो यह और भी खतरनाक रूप अख्तियार कर सकता है। आपकी पूरी पर्सनल जानकारी के बदले वह बिटक्वाइन के रूप में पैसे की मांग कर सकता है।

क्या है बिटक्वाइन
बिटक्वाइन एक नई और डिजिटल मुद्रा है। कंप्यूटर नेटवर्किंग आधारित भुगतान के लिए इसे बनाया गया है। 2008 में दुनिया में आर्थिक संकट चरम पर था। उसी वक्त सातोशी नकामोतो नाम के एक कंप्यूटर प्रोग्रामर ने बिटक्वाइन का विचार रखा, जिसके तहत वर्चुअल लेन-देन के लिए एक मुद्रा की कल्पना की गई थी। कोई नहीं जानता कि सातोशी कौन है। कई तकनीकी दिक्कतों को सुलझाने के बाद जनवरी 2009 में बिटक्वाइन नामक मुद्रा व्यवस्था की शुरुआत हुई। यह पूरी तरह भरोसे पर आधारित व्यवस्था है। पारंपरिक मुद्राओं के उलट, यह किसी देश या बैंक से नहीं जुड़ी है। न ही इसका कोई भंडार (रिजर्व) है।

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तेजी से बढ़ी मुद्रा की कीमत
बिटक्वाइन मुद्रा की कीमत तेजी से बढ़ी है। 2008 में शुरुआत के वक्त यह महज 10 डॉलर प्रति बिटक्वाइन थी, जो 2013 में 1,000 डॉलर तक पहुंच गई। जुलाई 2016 में एक बिटक्वाइन की कीमत 75000 डॉलर आंकी गई।

कौन करता है इस्तेमाल
यूं तो बिटक्वाइन का इस्तेमाल हम, आप कोई भी कर सकता है, लेकिन इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल गैरकानूनी लेन-देन में किया जा रहा है। ड्रग्स और अवैध पैसे का लेन-देन करने वालों के लिए यह वर्चुअल मुद्रा एक वरदान की तरह है। इसके लेन-देन का कोई रिकॉर्ड नहीं रखा जाता और एक बार आप बिटक्वाइन किसी अन्य अकाउंट में ट्रांसफर कर देते हैं, तो उसे वापस नहीं लिया जा सकता। साथ ही अकाउंट की डीटेल भी नहीं देखी जा सकती। बिटक्वाइन की स्वीकार्यता उत्तरी अमरीका, यूरोप और पूर्वी एशियाई देशों में तेजी से बढ़ी है।

“यह पैसों के लेनदेन का वैध तरीका है, लेकिन इसका इस्तेमाल वैसे लोगों कर सकते हैं, जिनकी नीयत में खोट हो।
एफबीआई, डिजिटल किडनैपिंग की एक सुनवाई के दौरान

कैसे होता है लेनदेन
यह ट्रांजेक्शन-लेजर से नियंत्रित मुद्रा लेनदेन हैं। इसके लिए आपको बिटक्वाइन वेबसाइट पर एक अकाउंट खोलना होगा। यह किसी मोबाइल एप या कंप्यूटर प्रोग्राम जैसा ही है। खाता खुलने पर आपको बिटक्वाइन वॉलेट मिल जाता है। इसके तहत आप बिटक्वाइन किसी को भेज सकते हैं और अपने अकाउंट में ले भी सकते हैं। इस लेनदेन की कोई फीस  नहीं लगती है। किसी को यह जानकारी नहीं होती कि आपने किससे कितना पैसा लिया। यह सार्वजनिक और स्थायी भुगतान होता है। कंप्यूटर गैरतकनीकी जानकारों, हैकर्स, ड्रग डीलर्स और खरीदार, से लेकर सोने के तस्करों तक यह लोकप्रिय है। कनाडा में बिटक्वाइन का एक एटीएम भी खुला है जिसमें ग्राहक बिटक्वाइन के बदले कैश या कैश के बदले बिटक्वाइन ले सकते हैं।

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क्यों फैल रहा है बिटक्वाइन और डिजिटल किडनैपिंग का खतरा
इसकी एफिशिएंसी बहुत अधिक है।
दुनिया के किसी भी कोने में मुद्रा तुरंत भेजी जा सकती है।
किसी बैंक या बिचौलिये की जरूरत नहीं
बहुत ज्यादा फीस की जरूरत नहीं। बेहद कम दाम में प्रोसेसिंग।
लेनदेन में व्यक्ति की निजता सुरक्षित।
ट्रांजेक्शन में व्यक्तिगत सूचना का इस्तेमाल नहीं।
पहचान की चोरी न करने का पूरा भरोसा
लेन-देन पर पूरा नियंत्रण
पूरी तरह सार्वजनिक
सारा लेन-देन डाटाबेस में उपलब्ध

भारत में बिटक्वाइन
भारत में बिटक्वाइन को बढ़ावा देने और इसके प्रचार-प्रसार के मकसद से बेंगलुरू में दिसंबर 2013 में एक कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया था। यह दुनिया का अपनी तरह का पहला आयोजन था।

कुछ दिलचस्प तथ्य
10 करोड़ से ज्यादा बिटक्वाइन यूजर्स हैं दुनियाभर में
1.5 लाख से ज्यादा लोग भारत में कर रहे हैं बिटक्वाइन का इस्तेमाल
10 मिनट में एक बिटक्वाइन लेनदेन होता है दुनिया में
12.5 बिटक्वाइन प्रति हैकिंग की दर निर्धारित है फिलहाल
2.2 करोड़ बिटक्वाइन हैं इस वक्त प्रचलन में
90 हजार बिटक्वाइन का लेनदेन हुआ एक सौदे में 8 नवंबर 2010 को। यह अब तक का सबसे बड़ा बिटक्वाइन वित्तीय लेनदेन है।

बिटक्वाइन चोरी के मामले भी
अन्य मुद्राओं की तरह इस डिजिटल मुद्रा की चोरी के भी कई मामले सामने आए है। 2013 में एक यूजर से शिकायत की थी कि उसके 7500 बिटक्वाइन चोरी हुए हैं। तब इनकी कीमत 75 लाख डॉलर (45 करोड़ रुपए) आंकी गई थी। एक अनुमान के मुताबिक प्रति दिन करीब 12 करोड़ डॉलर के बिटक्वाइन की चोरी होती है।