प्रियंका योशिकावा : पहली बार भारतीय मूल की युवती ने जीता मिस जापान का ताज

7 सितंबर 2016 के राजस्थान ​पत्रिका में प्रकाशित

सचिन श्रीवास्तव
ऑस्ट्रेलिया, यूरोप, अमरीका से होते हुए नस्लीय नफरत की आग जापान में भी तेज हो गई है। बीते साल अरियाना मियामोतो मिस जापान चुनी गई थीं। यह खिताब जीतने वाली वह पहली अश्वेत महिला थीं। उन्हें आलोचनाओं का दौर अभी थमा भी नहीं था कि अब प्रियंका योशिकावा को यह ताजा पहनाया गया है। भारतीय मूल की प्रियंका की खिताबी जीत के साथ जापान में नए सिरे से नस्लीय बहस शुरू हो गई है।

प्रियंका योशिकावा
जन्म: 20 जनवरी 1994
भारतीय पिता और जापानी मां की संतान। टोक्यो में जन्म। मिस जापान बनने वाली पहली भारतीय युवती। हाथियों को देती हैं ट्रेनिंग। शौकिया किक-बॉक्सर।

“हां, मैं आधी भारतीय हूं और लोग मुझसे मेरी नस्ली शुद्धता के बारे में पूछते हैं। मुझे अपने पिता के भारतीय होने पर गर्व है। मुझे गर्व है कि मेरे अंदर भारतीयता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मैं जापानी नहीं हूं।प्रियंका योशीकावा, एक इंटरव्यू के दौरान 

हाफू कहकर पुकारते हैं
जापान में मिश्रित नस्ल के लोगों को हाफू कहकर पुकारते हैं। प्रियंका को भी इससे पुकारा जाता रहा है। 2012 में जापान में कुल पैदा हुए बच्चों में से 2 प्रतिशत मिश्रित नस्ल के थे। यहां मिश्रित आबादी लगातार बढ़ रही है।

यह भी पढ़ें:  संगीत की दुनिया : इस साल को खास बना रहीं ये नई शैलियां

भारत में रही हैं प्रियंका
हाथियों की प्रोफेशनल ट्रेनर प्रियंका करीब एक साल भारत में रही हैं। बताया जाता है कि उनके परदादा के कोलकाता स्थित घर में एक बार दो सप्ताह के लिए महात्मा गांधी रुके थे। प्रियंका करीब तीन साल अमरीका के सैक्रामेंटो में रही हैं।