खबरों से खेलते सितारे: विवाद नहीं, यह उनकी फिल्मों का प्रचार है

7 जुलाई 2016 को पत्रिका के युवा पेज पर प्रकाशित
सचिन श्रीवास्तव
मुंबई. 5400 से ज्यादा स्क्रीन पर रिलीज हुई “सुल्तान” की शानदार शुरुआत के बीच यह भुला दिया गया कि हाल ही में सलमान खान ने रेप संबंधी विवादित बयान दिया था। इसके बाद उनके खिलाफ माहौल बना और खुद मिस्टर परफेक्टनिस्ट ने इस आग में घी डाला। यानी बॉलीवुड नकारात्मक प्रचार भुनाने के मामले में कई कदम आगे बढ़ चुका है। “सुल्तान” इसका ताजा उदाहरण है।
नकारात्मक प्रचार को भुनाने का यह नया चलन बीते तीन-चार साल में बढ़ा है। इस मसले पर मुंबई स्थित एक बड़ी पीआर एजेंसी के प्रतिनिधि कहते हैं, “हम पर फिल्म की रिलीज से पहले ज्यादा से ज्यादा खबरें प्रकाशित कराने का दबाव रहता है। कलाकारों के इंटरव्यू और फिल्म की कहानी पर आधारित एक-दो खबरें तो आ जाती हैं, लेकिन एक महीने पहले से लोगों को दिमाग में फिल्म का नाम चस्पा करने के लिए नकारात्मक प्रचार की जरूरत होती है।” वे कहते हैं कि “इसे बिना किसी अधिक प्रयास के सोशल मीडिया पर ट्रेंड भी कराया जा सकता है। लोग नकारात्मक खबरों से जल्दी जुड़ते हैं।” वे बताते हैं कि ‘निगेटिव प्रचार पर बॉलीवुड के ज्यादातर बड़े फिल्म निर्माता एकमत हैं।”
अगले विवाद के सवाल पर पीआर प्रतिनिधि हंसते हुए कहते हैं, ‘कुछ ही दिनों में सामने आ जाएगा, आखिर साल की सबसे बड़ी पांच रिलीज अभी बाकी हैं।”
सितारों की निगेटिव छवि पर वे कहते हैं, ‘हमारे स्टार्स फैन बेहद लॉयल हैं, उन्हें इससे फर्क नहीं पड़ता कि निजी जिंदगी में स्टार कैसा रुख अख्तियार करते हैं।” बहरहाल, सुल्तान से उम्मीद की जा रही है कि वह ओपनिंग के सभी रिकॉर्ड तोड़ देगी।
सितारों की लड़ाई है फायदे का सौदा
अक्सर सितारों के बीच तनातनी की खबरें आती रहती हैं। बॉलीवुड के आंतरिक सूत्रों के मुताबिक यह खबरें जानबूझकर उछाली जाती हैं। यह ज्यादातर किसी सितारे की फिल्म आने के एक से दो महीने पहले किया जाता है। उस सितारे से जुड़ी खबर में उसके आगामी प्रोजेक्ट की जानकारी भी जाती है, जिससे फिल्म के प्रचार को ताकत मिलती है। 
नकारात्मक प्रचार का बाजार
5-10% तक रकम प्रचार पर खर्च करते हैं निर्माता
45 दिन पहले से शुरू हो जाता है फिल्म का प्रचार 
3 स्तर पर होता है प्रचार। पहला, इंटरव्यू। दूसरा, कहानी और अन्य फिल्मों से तुलना। तीसरा, कंट्रोवर्सी खड़ी करना
80 प्रतिशत सफलता सुनिश्चित होती है निगेटिव प्रचार से
50 करोड़ रुपए से ज्यादा बजट की फिल्मों से जुड़े होते हैं ज्यादातर विवाद
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