Disaster Management Act

Disaster Management Act: आपदा प्रबंधन अधिनियम के बारे में जानें जरूरी बातें

प्रदीप कुमार सिंह

इन दिनों आपदा प्रबंधन अधिनियम (Disaster Management Act) 2005 की काफी चर्चा हो रही है। आखिर क्या है यह अधिनियम और इसकी चर्चा क्यों हो रही है, इस बारे में जानते हैं। आपदाओं के प्रभावी प्रबंधन और उससे संबंधित या उसके अनुषंगिक विषयों का उपबंध करने के बारे में यह अधिनियम है।

इस अधिनियम (Disaster Management Act, 2005) का विस्तार क्षेत्र पूरा भारत पर है। यह उस तारीख से लागू होता है, जो केंद्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करती है। इस अधिनियम (Disaster Management Act, 2005) के भिन्न-भिन्न उपबंधों के लिए, भिन्न भिन्न राज्यों के लिए, भिन्न-भिन्न तारीख नियत की जा सकती है। किसी राज्य के उपबंध में इस अधिनियम के किसी उपबंध के प्रारंभ के प्रति किसी निर्देश का अर्थ यह लगाया जाएगा कि वह उस राज्य में उस उपबंध के प्रारंभ के प्रति निर्देश है।

इस अधिनियम (Disaster Management Act, 2005) की धारा 2(घ) यह कहती है कि किसी क्षेत्र में प्राकृतिक या मानव कृत कारणों से, या दुर्घटना या उपेक्षा से अधिक ऐसी कोई महा विपत्ति, अनिष्ट, विपत्ति या घोर घटना अभिप्रेत है, जिसका परिणाम जीवन की सारवान हानियां मानवीय पीड़ाएं, या संपत्ति का नुकसान और विनाश या पर्यावरण का नुकसान या अवक्रमण है और ऐसी प्राकृति या परिमाण का है, जो प्रभावित क्षेत्र के समुदाय की सामना करने की क्षमता से परे है।

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धारा 2(ड) इस खतरे से निपटने के लिए तैयारी के बारे में है, जो किसी आपदा की आशंका की स्थिति या आपदा और उसके प्रभावों से निपटने के लिए तैयार रहने की स्थिति अभिप्रेत है। धारा 3 के अंतर्गत राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की स्थापना करने का उल्लेख है।

इस अधिनियम (Disaster Management Act, 2005) की धारा 12 के अंतर्गत राहत के न्यूनतम मानकों के लिए मार्गदर्शक का सिद्धांत दिया हुआ है, जिसमें राष्ट्रीय प्राधिकरण आपदा से प्रभावित व्यक्तियों को उपलब्ध कराई जाने वाली राहत के न्यूनतम मानकों के लिए मार्गदर्शक सिद्धांतों की सिफारिश करेगा, जिनके अंतर्गत निम्नलिखित होंगे-
(1) राहत कैंपों में आश्रय स्थल, खाद्य, पीने का पानी, चिकित्सा सुविधा और स्वच्छता के संबंध में उपलब्ध कराई जाने वाली न्यूनतम अपेक्षाएं।
(2) विधवाओं और अनाजों के लिए किए जाने वाले विशेष उपबंध।
(3) जीवन की हानि मद्दे अनुग्रह सहायता, मकानों को नुकसान मद्दे सहायता, जीविका के साधनों की बहाली के लिए सहायता।
या
(4) ऐसी अन्य सहायता जो आवश्यक हो।
मार्गदर्शक सिद्धांतों की सिफारिश करेगा जिनके अंतर्गत निम्नलिखित होंगे
39 के अंतर्गत राज्य सरकार के विभागों के उत्तरदायित्व के बारे में बताया गया है।

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39(च)(2) के अंतर्गत किसी आपदा से नुकसान का निर्धारण करना बताया गया है। 39(ज)(6) के अंतर्गत प्रभावित क्षेत्र में पीने के पानी की व्यवस्था करना आवश्यक रसद की व्यवस्था करना स्वास्थ की देखरेख सेवाएं उपलब्ध कराना बताया गया। इस अधिनियम की धारा 55 और 56 में किसी सरकारी अधिकारी के कर्तव्य पालन में कमी के संबंध में बताया गया है और उसका दंड भी बताया गया है।

धारा 61 के अंतर्गत आपदा से पीड़ित किसी व्यक्ति को प्रतिपूर्ति और राहत देते समय उसके लिंग, जाति, समुदाय या जन्म स्थान और धर्म के आधार पर कोई भी भेद नहीं किया जाएगा।

(Centre for social Justice, parwaz teem)