Lockdown: लॉकडाउन के साइड इफेक्टः घर की छोटी बातें बन रही हैं बड़ी समस्या

प्रदीप सिंह

Side effects of Lockdown: सिकंदराबाद गांव की बानो बी के परिवार में सात लोग हैं। इनमें दो बहुएं, दो लड़कियां और तीन लड़के हैं। लड़कों के काम-धंधे बंद पड़े हैं। इस वक्त सभी लोग घर में है और आसपास के मौजूदा माहौल और आर्थिक संकट ने सभी को अवसाद से भर रखा है। नतीजे में परिवार में आए दिन कलह होता रहता है। जाहिर है कि इसकी शिकार सबसे ज्यादा बहुए ही होती हैं।

सास बानो बी (परिवर्तित नाम) का कहना है कि आजकल बहुएं परेशान कर रही हैं। बहू का आरोप है कि काफी दिनों से रोज़मर्रा का बहुत सारा सामान खत्म है। सामान न होने की वजह से खाना अच्छा नहीं बन पा रहा है। इसके लिए हमें जिम्मेदार ठहराया जाता है। खाना खाते समय पुरुष लोग ताने मारते हैं। कभी-कभी तो वह अपशब्द का भी प्रयोग करते हैं। अगर यही रवैया रहा तो हम अपने मायके चले जाएंगे।

परिवार के सभी सदस्य एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। इस आपदा की घड़ी में हंसता-खेलता परिवार बिखरने के कगार पर है। बहुओं ने कहा कि दिन भर यह लोग घर में रहते हैं कुछ न कुछ बनाने, कुछ न कुछ करने को कहते रहते हैं। इसकी वजह से हम लोग आराम नहीं कर पाते और पूरा दिन इन्हीं के काम में व्यस्त रहते हैं। इसके बाद भी खाने के समय यह लोग ताने मारते हैं कि सब्जी सही नहीं बनी है। दाल सही नहीं बनी है। मसाले कम हैं। कोई बोलेगा रोटी पतली है। किसी के लिए रोटी मोटी तो किसी को गरम खाना चाहिए तो किसी को ठंडा।

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उनके ससुर इमरान (बदला हुआ नाम) ने कहा कि इसमें ज्यादातर गलती लड़कों की है। वह समय पर नहाएंगे नहीं। मंजन नहीं करेंगे और खाना तो समय पर बन जाएगा उसके लिए इन्हें क्यों बुरा भला बोलते हो। जो गर्म खाता है उसके लिए ठंडा हो जाता है और जो ठंडा खाता है उसके लिए गर्म हो जाता है। इसमें बहुओं की कहां कमी है। अगर मसाले कम हैं सब्जी में तो उसके जिम्मेदार हम लोग थोड़ी है। अगर हमें मसाले लाकर देंगे तो बराबर पड़ेंगे। रहा सवाल रोटी मोटी और पतली का तो अगर इन लोगों को बता दोगे तब तो ये आपकी पसंद जानेंगे।

ससुर ने कहा, “कोई दोपहर दो बजे नहा रहा है तो कोई तीन बजे नहा रहा है। क्या पूरे दिन खान-चौके में लगी रहेंगी। घर के कुछ और भी काम होते हैं, उन्हें कौन करेगा।” बहुओं ने कहा कि पापा सही कह रहे हैं। उन लोगों की बात सुनकर हमें समझ आया कि लॉकडाउन के कारण सभी लोग घर पर हैं, जिसके कारण सभी लोग मानसिक तौर पर अस्वस्थ्य हैं।

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उनको समझाया गया कि इस संकट की घड़ी में अगर आप लोग ऐसे लड़ते-झगड़ते रहोगे तो आप लोगों की इम्युनिटी ऑटोमेटिक कम हो जाएगी और आप लोग किसी न किसी बीमारी के शिकार हो जाएंगे।। आजकल तो अस्पतालों में जगह भी नहीं है। बहुत कम डॉक्टर ओपीडी देखते हैं और उसके अलावा भी उनकी अच्छी खासी फीस होती है। अब तय आपको करना है कि हमें कैसे रहना है। कुछ ही समय की बात है अगर आपस में एक-दूसरे से तालमेल बनाकर चलेंगे तो इस संकट की घड़ी से उबरा जा सकता है।

साथ ही सास और ससुर से कहा गया कि आप लोग थोड़ा बहुओं को आराम करने का भी समय दिया करें, क्योंकि वह भी थक जाती हैं दिन भर काम करते-करते। दोनों को बात समझ में आ गई और उन्होंने कहा कि आगे से वह इसका ध्यान रखेंगे।

उनकी बहुओं ने कहा कि आगे से मैं ऐसा नहीं करूंगी और उनके पतियों ने भी पत्नियों को सम्मान और सहयोग करने को कहा।

यह केस स्टडी से यह बात समझने की है कि छोटी-छोटी बातें बड़ी समस्याओं को जन्म देती हैं। सभी परिवार में स्नेह, सम्मान और सहयोग के साथ रहें। परिवार के सदस्य एक-दूसरे का हाथ बंटाएं। समस्या होने पर आपस में बैठकर बात करें।

परवाज़ टीम से प्रदीप