Forest Department Attack

Forest Department Attack: मध्य प्रदेश के वन मंत्री के गृह ज़िले में वन विभाग का आदिवासियों पर हमला!

Forest department attack: खंडवा में आदिवासियों को बर्बरता पूर्वक बेदखल किया
बेदखली, लूट और अपहरण के खिलाफ आदिवासी लामबंध
जामनिया के निवासियों और कार्यकर्ताओं पर अवैध कार्यवाही

भोपाल। मध्य प्रदेश में वन अधिकार कानून लागू है। इस कानून की निगरानी और क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने वाले वन विभाग की कमान प्रदेश के एक आदिवासी राजनेता के हाथों में। इसी वन अधिकार अधिनियम की धारा 4 (5) के मुताबिक दावों के निराकरण तक किसी की बेदखली नहीं की जा सकती है। उधर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के 23 अप्रैल और 15 जून के आदेशों मुताबिक भी 15 जुलाई तक प्रदेश में किसी प्रकार की बेदखली प्रतिबंधित है। यह सभी तथ्य हैं, लेकिन दिक्कत यह है कि वन मंत्री के गृह जिले में ही इन नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और इस काम में प्रशासन कठघरे में है। इस खबर से जुड़ी तस्वीरें हालात को बयान कर रही हैं। मामले में डीएफओ का पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका है।

जागृत आदिवासी दलित संगठन (JADS) की ओर से जारी पूरे बयान को यहां क्लिक कर पढ़ा जा सकता है

वन विभाग की अवैध बेदखली, अपहरण एवं अवैध बंधक बनाए जाने बाबत शिकायत

यह मामला शुरू हुआ है, 10 जुलाई से जब ग्राम नेगांव (जामनीया) जिला खंडवा में वन विभाग ने 40 आदिवासी परिवारों के घर तोड़े (Forest Department Attack) और उनके खेत नष्ट किए। यहां कार्यरत संस्था जागृत आदिवासी दलित संगठन के मुताबिक, दूसरे गांव के ग्रामीणों की एक भीड़ से आदिवासियों के सभी सामान- मुर्गियां, बकरियां, अनाज, बर्तन, पैसे- लुटवाए गए। पत्थर और लाठीयों से आदिवासियों पर हमला किया गया। यहां तक कि महिलाओं को भी नहीं छोड़ा। इन परिवारों के पास अभी तन पर रह गए कपड़ों के अलावा कुछ नहीं बचा है।

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जागृत आदिवासी दलित संगठन (JADS) ने इस मामले में जारी बयान में कहा है कि हमले के दौरान तीन नेगाँव निवासी और फिर इस कार्रवाई की वैधता पर सवाल करने वाले 3 सामाजिक कार्यकर्ताओं को मारते हुए अपहरण कर 12 घंटों तक वन विकास निगम के कार्यालय में रखा गया। 3 व्यक्तियों के फोन भी वन अमले ने छीने, जो अभी भी नहीं लौटाए गए हैं।

खबर फैलते ही कई गांव से सैंकड़ों आदिवासी, खंडवा पुलिस अधीक्षक के कार्यालय पर धरने पर बैठ गए। इसके बाद देर रात तक बंधक बनाए गए व्यक्तियों को छोड़ा गया। इन व्यक्तियों के खिलाफ केस दर्ज़ होना बताया गया है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के उल्लंघन में इस बारे में पूरी जानकारी नहीं दी गई है। उनसे कोरे काग़ज़ पर हस्ताक्षर करवाया गया है।

जागृत आदिवासी दलित संगठन ने इस मामले में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, वन मंत्री विजय शाह, आदिवासी कल्याण मंत्री मीना सिंह मांडवे और मुख्य सचिव, वन सचिव, प्रमुख मुख्य वन संरक्षक और ज़िला प्रशासन को मामले की विस्तृत जानकारी दी है। साथ ही मांग की है कि इस अवैध बेदखली, लूट और मार पीट, अपहरण कर बंधक बनाने के सरकारी डकैती और गुंडागर्दी के खिलाफ ‘अत्याचार अधिनियम’ और आईपीसी के अंतर्गत सख्त कार्यवाही होनी चाहिए। पीड़ित परिवारों को मुआवजा और उनके लिए आवास और राशन व्यवस्था की मांग भी संगठन की ओर से की गई है। संगठन ने चेतावनी दी है कि ऐसा न होने पर व्यापक आंदोलन किया जाएगा।

  • जागृत आदिवासी दलित संगठन की मांगें
    अवैध बेदखली और लूट का नेतृत्व कर रहे डीएफ़ओ चरण सिंह और अन्य अधिकारियों पर ‘वन अधिकार अधिनियम’ और हाई कोर्ट के आदेशों की अवमानना के लिए कार्यवाही की जाए।
    आदिवासियों को उनकी जमीन से बेदखल करने के लिए अत्याचार अधिनियम के अंतर्गत संबंधितों पर केस दर्ज कर गिरफ्तार किया जाए।
    मार पीट, अपहरण कर बंधक बनाने के बारे में वन अमले पर अत्याचार अधिनियम के अंतर्गत एफ़आईआर दर्ज कर कार्यवाही की जाए।
    बेघर हुए परिवारों को तुरंत खाने के लिए राशन की सामाग्री उपलब्ध की जाए एवं उनको पूरे नुकसान का मुआवजा दिया जाए।
    बंधक बनाए गए व्यक्तियों के चोरी किए गए फोन तुरंत लौटाए जाएं। बंधक बनाए गए व्यक्तियों द्वारा सभी झूठे एवं असत्य कागजी दस्तावेज़ों को खारिज किया जाए।
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इस मामले में संगठन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि अंग्रेजों के वन क़ानून के कारण आदिवासियों ने उनके खिलाफ सब से तीखे, दिलेर और बहादुराना संघर्ष किए थे। वन अधिकार अधिनियम अंग्रेजों द्वारा किए गए “ऐतिहासिक अन्याय” को खत्म करने के लिए पारित किया गया था, लेकिन उसे दरकिनार कर अंग्रेजों का अत्याचार ‘आज़ाद’ भारत में जारी रखा गया है। आज़ादी की लड़ाई में शहीद हुए इस क्षेत्र के टंटया भील, वीर सिंग गोंड, गंजन कोरकू, भीमा नायक जैसे योद्धाओं की कुर्बानी को अपमानित करते हुए, उनके वंशजों के साथ इस तरह का बर्ताव किया जा रहा है।

हालात को नुमायां करती कुछ और तस्वीरें