Aishbagh Janta Quarter: भोपाल के 600 परिवार की 3000 जिंदगियां खतरे में

Aishbagh Janta Quarter के बाशिंदों के जर्जर मकान बने मुसीबत, जाएं तो कहां जाएं

भोपाल। कोरोना काल में काफी कुछ बदला है। आवागमन के साधनों से लेकर चौक चौराहों पर पुलिस की सख्ती और खाने की चीजों की किल्लत से लेकर मिलने जुलने तक पर पाबंदियां आयद की गई हैं। लेकिन इस दौर में कुछ नहीं बदला है ​तो वह सरकार और प्रशासन का रवैया। सरकारी हाकिम नियमों की आड़ में लोगों को परेशान करने का कोई मौका न कभी चूकते हैं, और शायद न कभी चूकेंगे। इसका नया उदाहरण है भोपाल के ऐशबाग इलाके की जनता क्वार्टर आवासीय कालोनी।

इस कालोनी में करीब 600 परिवार रहते हैं। यहां करीब 3000 लोग रहते हैं। ई डब्ल्यू एस आवासों में यह परिवार बीते करीब 35 साल से रह रहे हैं। अभी पिछले सप्ताह इन सभी परिवारों को नगर निगम की ओर से एनाउंस किया गया कि मकानों को खाली कर दें। वजह यह है कि इस इलाके के सर्वे के आधार पर यहां के मकानों को जर्जर पाया गया है। अब नगर निगम इन मकानों को तोड़ना चाहता है। प्रशासन ने रहवासियों के शिफ्टिंग को लेकर किसी भी प्रकार का इंतजाम नहीं किया गया है और ना ही किसी भी तरह की रहने की व्यवस्था की है।

इस वीडियो में दर्ज हैं ऐशबाग जनता क्वार्टर के बाशिंदों की तकलीफें और गुस्सा

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एक स्थानीय नागरिक ने बताया कि नगर निगम की ओर से यह ऐलान किया गया है कि जो लोग यहां रह रहे हैं, वह इन मकानों को खाली कर दें। अगर बारिश के कारण कोई दुर्घटना होती है तो सरकार और प्रशासन और नगर निगम की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी और इसका कोई मुआवजा भी नहीं दिया जााएगा।

जाहिर है सरकार अपने नागरिकों की मुश्किलों से पल्ला झाड़ने की तरकीबें बखूबी जानती है। दिक्कत यह है कि सरकार और सरकारी हाकिम यह एक प्रक्रिया के तहत करते हैं और गरीबों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है।

दरअसल बीते करीब पांच सालों से यानी 2016 से लगातार बारिश के वक्त यहां के लोगों को नोटिस दिया जाता है। गाड़ी में अनाउंस किया जा रहा है कि सरकार जिम्मेदार नहीं हैं, जो लोग रहे रहे हैं कोई मुआवजा नहीं मिलेगा।

स्थानीय लोग इस नए फरमान से काफी परेशान हैं और कोरोना की मौतों पर बहस, तब्सरे के अलावा अब वे इस पर एक दूसरे से बात कर रहे हैं। बातचीत में लोगों ने बताया कि उनके पास पहले ही पैसा नहीं हैं। अगर पैसा होता तो जर्जर मकान में क्यों रहते? दिक्कत यह है कि कोरोना ने आमदनी पूरी तरह खत्म कर दी है और अब इस बारिश में अगर नगर​ निगम मकान तोड़ता है, तो हम कहां जाएंगे।

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बिल्डिंग में रह रहे लोगों का कहना है कि हम क्वार्टर तब तक खाली नहीं करेंगे जब तक कि प्रशासन हमारे रहने की उचित व्यवस्था नहीं कर देता है। रहवासियों के मुताबिक हर साल बारिश में कॉलोनी में बोर्ड लगा दिया जाता है लेकिन मकानों का आवंटन नहीं किया जाता है। इससे पहले भी लोगों को मकान खाली करने को कहा गया लेकिन रहवासियों और प्रशासन के बीच किसी भी प्रकार का रास्ता नहीं निकल सका और ना ही नगर निगम की तरफ से कोई भी ठोस कदम उठाया गया है। यूं तो कई बार बिल्डिंग के बाहर नोटिस लग चुका है लेकिन अब तक लोगों को बिल्डिंग खाली करने का नोटिस नहीं मिला है।

कुछ लोगों ने कहा कि वे मकान खाली करने को तैयार हैं, बशर्ते सरकार उन्हें नया मकान बनाने के लिए पैसे दे या फिर उन्हें किसी अन्य जगह पर मकान दे।

बहरहाल, कोई भी अधिकारी इस मामले पर कुछ भी कहने से बच रहा हैं और हाउसिंग बोर्ड इस मामले को नगर निगम की ओर तो नगर निगम कमिश्नर कार्यालय की ओर इशारा कर रहा है।