अंतिम संस्कार करना हुआ महंगा

अंतिम संस्कार करना हुआ महंगा

भोपाल। कोरोना का संक्रमण बहुत तेजी से फैल रहा है, जिसके कारण प्रतिदिन कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है

और कोरोना संक्रमित व्यक्तियों की मृत्यु दर भी प्रतिदिन बढ़ रही है। पहली बार जब लॉकडाउन लगा था त

हा है। यह बहुत दुखद घटना है कि अंतिम संस्कार के लिए लोग शव का अस्पताल से आने का घंटों इंतजार करते हैं। परिवार की उस दुखद स्थिति का अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता है।

ब भी हमारे पास कोई सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। उस समय भी लोग भुखमरी और बीमारी से मर रहे थे और महंगाई चरम सीमा पर थी। तब प्रशासन का कहना था कि अचानक लॉकडाउन इसलिए लगाया गया ताकि लोग संक्रमित ना हों और कोरोना पर नियंत्रण पाया जा सके। उस लॉक डाउन में भी अनगिनत लोग मारे गए थे।

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बेरोजगारी बढ़ी उद्योग धंधे ठप हो गए, लेकिन महंगाई निरंतर बढ़ती रही और आज भी बढ़ती जा रही है। इसका दुष्प्रभाव आम नागरिकों को झेलना पड़ रहा है। इसकी बानगी भदभदा विश्राम घाट पर भी देखने को मिली।

भदभदा विश्राम घाट पर प्रतिदिन शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। लोगों को अंतिम संस्कार के लिए घंटों इंतजार करना पड़ र

घंटों इंतजार करने के बाद जब परिवार को शव मिलता है तो उसका अंतिम संस्कार करने में भी परेशानी हो रही है। क्योंकि विश्राम घाट में लोगों से अंतिम संस्कार के लिए ज्यादा पैसा मांगा जा रहा है। पहले एक व्यक्ति के अंतिम संस्कार के लिए 2600 सौ रुपए देना पड़ता था, अब ₹3000 देना पड़ रहा है। इसकी वजह बताई जा रही ळै कि अचानक लकड़ियों के दाम बढ़ गए हैं। बिना लकड़ियों के लोग अपने परिजनों का अंतिम संस्कार कैसे करें।

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यह बहुत दुख की बात है कि आज महंगाई ने शव के अंतिम संस्कारों पर भी रोक लगा दी है। एक आम आदमी जो गरीब तबके का है, वह खाने से तो वंचित हो रहा है अब नौबत यह आ गई है कि वह अंतिम संस्कार से भी वंचित हो रहा है।

हमारे प्रशासन का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। आज हर चीज पर रोक लग गई है। लोगों का कहना है की महंगाई को पल-पल बढ़ती देखते आए हैं पर आज पहली बार देखा है कि अंतिम संस्कार करने पर भी महंगाई हावी हो गई है।

यह हमारी लॉकडाउन की व्यवस्था है।

सायरा खान
16 अप्रैल 2021