वेंटीलेटर और ऑक्सीजन की कमी से हो रही मौतें

 

वेंटीलेटर और ऑक्सीजन की कमी से हो रही मौतें
भोपाल। राजधानी भोपाल समेत मध्यप्रदेश और देश के अन्य हिस्सों से लगातार कोरोना के बढ़ते मामले सामने आ रहे हैं।
ऐसे में सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में ऑक्सीजन सिलेंडर और वेंटिलेटर की बहुत कमी है। हालत यह है कि आक्सीजन और वेंटिलेटर की कमी के कारण अब मौत के मामले भी बढ़ते जा रहे हैं।
ऑक्सीजन या वेंटिलेटर की कमी से हुई मौत प्रशासन और सत्ता के लिए महज एक आंकड़ा हो सकती है, लेकिन जो परिवार, परिजन इस तकलीफ से गुजरता है, मौत के दर्द को महसूस करता है, उसके लिए ये उम्र भर का नासूर बन जाता है।
ये नासूर, ये दर्द कल करीब से देखा। घटना भोपाल के कोलार की है। मरीज़ को सांस लेने में बहुत तकलीफ हो रही थी और लगातार बुखार भी आ रहा था। ऐसे में एक हफ्ते पहले ही उन्होंने कोरोना की जांच कराई, जो निगेटिव आई थी। इसके बाद वेकसीन भी लगवाई। उस दौरान मरीज़ को तेज़ बुखार आने लगा। कल दिन भर से ही तबियत खराब होने लगी और सांस लेने में तकलीफ बढ़ने लगी थी।
मरीज़ के परिवार वालों ने सुबह से अस्पतलों की भागदौड़ की, लेकिन उन्हें किसी भी अस्पताल में बैड खाली नहीं मिला। ना ऑक्सीजन मिला। परिवार वालों ने अस्पतालों में लगातार बातचीत की लेकिन हर जगह से ना उम्मीद ही मिली।
सुबह से निकले परिवार वालों को शाम तक किसी अस्पताल में बेड खाली नहीं मिला। आखिर लंबी भागदौड़ के बाद उनको रात के 2 बजे नारियल खेड़े के अस्पताल में एक बैड मिला।
इस दौरान मरीज़ को सांस लेने में तकलीफ बढ़ने लगी। जिसको देखकर वहाँ के डॉक्टर ने जवाब दिया कि बिना वेंटीलेटर के इनको बचा पाना बहुत मुश्किल है। उस अस्पताल में एक ही वेंटीलेटर था, जो किसी और को लगा था। ये कहकर डॉक्टर ने अपना पल्ला झाड़ लिया कि उनके पास एक ही वेंटीलेटर है। तो आप लोग कहीं और देख लें।
परिवार ने ये बात सुनी तो वो बहुत घबरा गए। अपनी तरफ से कोशिश करने लगे।
मरीज़ की हालत खराब होती रही। सांस काबू में नहीं आ रही थी। उस अस्पताल से कोई मदद नहीं मिली।
परिवार वाले सारी रात वेंटीलेटर की तलाश में कई अस्पताल में कॉल करने लगे पर उनका कॉल किसी भी अस्पताल में नहीं उठाया गया।
ऐसे में lbs, नर्मदा, बंसल अस्पताल में कॉल किया तो वहां पर कोई भी बेड खाली नहीं है और ना कोई वेंटीलेटर है, ये जवाब मिला।
इस दौरान परिजनों ने अपने और साथियों से संपर्क किया और अस्पतालों के संपर्क नम्बर लिए।
सुबह 5 बजे से चिरायु, नोबल और अन्य अस्पतालों के हेल्पलाइन पर लगातार कॉल करने के बाद भी एक नाजुक हालत से जूझ रहे मरीज़ को वेंटीलेटर नहीं मिल पाया। और ना उन अस्पतालों में उसको जगह मिली।
अगले एक घंटे में उनकी हालत सांस ना लेने की वजह से और नाजुक हो गई।परिवार वाले बहुत परेशान हुए। नाज़ुक हालत में अस्पतालों में दर दर भटकता रहे और आखिरकार परिजनों ने अपने व्यक्ति को खो दिया।
परिज़नों से बात की तो उनको ज़िंदगी भर एक ही शिकायत रहगी कि इतने बड़े भोपाल में एक व्यक्ति को बचाने के लिए एक वेंटीलेटर भी इतने बड़े अस्पतालों में नहीं मिला। हम ने अपने एक व्यक्ति को खो दिया जो हमेशा सबका साथ देते थे और बुरे समय में अपनों की ढाल बने रहते थे। उसके लिए सुसराल हो या मायका या उनके रिश्तेदार या पड़ोसी सब एक बराबर थे।और आज वो वेंटीलेटर के ना मिलने से हमारे बीच नहीं रहा।
किसी शासन, सत्ता, प्रशासन, अखबार या किसी रिपोर्ट के लिए वो शख्स महज एक आंकड़ा हो सकता है। लेकिन इस संख्या, इस आंकड़े के इर्द गिर्द एक पूरा जीवन था, कुछ और जिंदगियां थीं, जो अब उदास हैं।
और ये पहला केस नहीं है। इसके 3 दिन पहले भी इसी परिवार के एक रिश्तेदार जिनको covid था, पर उनको भी वेंटीलेटर ना मिलने की वजह से उनकी मौत हो गई।
Nighat, Eka
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