पापा ने दी उम्र भर के लिए सीख: स्वरा भास्कर

9 जुलाई 2016 के राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित

सचिन श्रीवास्तव
पत्रिका के रिश्ते पेज पर हमने एक नया कॉलम शुरू किया है और इसकी शुरुआत मेरी पसंदीदा कलाकारों में से ए​क स्वरा भास्कर से हो रही है। स्वरा ने यह बातचीत फोन पर तीन टुकड़ों में की है। शूटिंग के बीच में। तीन दिन पहले उन्हें फोन किया था और उन्होंने बातचीत का वादा किया। बाद में उन्हें समय नहीं मिला और आज सुबह—सुबह उनका फोन आया। पांच मिनट की बातचीत के बाद फिर उनका अगला शॉट रेडी था और बातचीत रुकी। शॉट देने के बाद उन्होंने फिर बात करना शुरू किया। यह बयान इसलिए कि स्वरा जितनी उम्दा कलाकार हैं, उतनी ही बेहतरीन इंसान भी। दीगर बात है कि वे मेरे बड़े भाई की सहपाठी भी रही हैं, सो उनके साथ बातचीत की छूट तो है ही…
अपने पिता के साथ रिश्तों पर स्वरा की यह बेबाक टिप्पणी उन्हीं की जुबानी

पापा ने दी उम्र भर के लिए सीख
स्वरा भास्कर
कमरे में बंद हो मैं अपने लड़की होने को कोस रही थी क्योंकि 9वीं क्लास में मेरा मासिक धर्म शुरू हुआ था। मुझे सालाना लीडरशिप ट्रेनिंग कैंप (एलटीसी) में जाना था। मैं बतौर मॉनिटर इसमें शामिल थी लेकिन इन दिनों ने सब गुड़ गोबर कर दिया था। स्कूल के बरामदे में अचानक, वह धब्बा नजर आया और में घर आ गई। मां न्यूयॉर्क में पीएचडी कर रही थीं। शाम को पापा घर लौटे। पापा ने पूछा तो मैंने कहा कि अब एलटीसी को छोडऩा पड़ेगा। उन्होंने पूछा, ‘क्यों? मैंने कहा ‘क्योंकि कल से मेरा मासिक धर्म शुरू हो रहा है।”
उन्होंने फिर कहा, ‘तो? इससे क्या?”
मेरे पापा ने पूछना जारी रखा, ‘इसका मतलब है कि ऐसे समय में तुम शारीरिक गतिविधियों के लिए सक्षम नहीं हो?”
मैंने कहा, “पापा आप समझते क्यों नहीं?”
पापा ने कहा, “इसका मतलब तुम सिर्फ कुछ हो जाएगा के डर से यह प्रोग्राम छोड़ रही हो! अगले महीने फिर इस समय कुछ आएगा तो छोड़ दोगी। अभी तुम 14 साल की हो। अगले 30 साल तक तुम्हें मासिक धर्म आएगा। इस दो दिन के हिसाब से सोचो तो करीब 720 दिन, 17280 घंटे तुम्हें छोडऩे होंगे। वह भी सिर्फ इस डर से कि कुछ हो जाएगा।”

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मेरे पास कोई जवाब नहीं था। पापा बोले देखो, “मुझे सुनने में बड़ा अजीब लग रहा है कि एक नेचुरल प्रॉसेस की वजह से तुम अपने इतने घंटे बर्बाद करो। एक ऐसी बात जो दुनिया की आधी आबादी के जीवन में हर महीने किसी न किसी समय सामने आती है। इससे नफरत करने या इससे डरने की जगह, इसे स्वीकार करो। इन दो दिनों या पांच दिनों को भी तुम महीने के सामान्य दिनों की तरह लो।”
मैंने पापा से 150 रुपये लिए। मासिक धर्म के दौरान इस्तेमाल करने के लिए पैड खरीदे। तब से अब तक मैं पापा की उस सीख पर अमल कर रही हूं।    
थैंक्यू, पापा