इनसेट-3डीआर: सटीक मौसम बताएगा, आपदा से भी बचाएगा

8 सितंबर 2016 को राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित

सचिन श्रीवास्तव
इंडियन नेशनल सैटेलाइट- 3डी रिपीट यानी इनसैट 3डीआर की लॉन्चिंग के साथ ही भारत ने अंतरिक्ष में मौजूदगी को और ज्यादा मजबूत कर लिया है। जैसा कि नाम से ही जाहिर है कि यह 2013 में प्रक्षेपित किए गए इनसैट-3डी का उन्नत वर्जन है। इसके जरिये हमें मौसम की ज्यादा सटीक और तुरंत जानकारी हासिल होगी। हालांकि मौसम की भविष्यवाणियों के लिहाज से अभी भी दुनिया के मुकाबले हम काफी पीछे हैं। लेकिन इनसैट-3डीआर की बड़ी खासियत मौसम विज्ञानियों को बारिश, तूफान और चक्रवात की सटीक भविष्यवाणी उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि यह धरती पर कुछ खोजने और आपदा के वक्त बचाव अभियानों में मदद करने का बड़ा काम करेगा।

आपदा के वक्त कैसे करेगा काम
इनसैट-3डीआर आपदा के वक्त कनाडा, फ्रांस, रूस और अमरीका के सैटेलाइट के संपर्क में आकर अपनी जानकारियों को साझा करेगा और मुश्किल हालात में फंसे लोगों की सटीक जानकारी बचाव दलों को उपलब्ध कराएगा। खास बात यह है कि यह जानकारी रियल टाइम में मिलेगी। यह आपदा स्थल की तस्वीरों को तुरंत देगा और हालात पर नजर रखेगा। जरूरत पडऩे पर यह अन्य 37 देशों और दो अन्य अंतरिक्ष संस्थाओं की मदद लेकर बचाव दलों को सूचनाएं देगा।

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भारत का चौथा मौसम विज्ञान संबंधी सैटेलाइट
भारत के पास इनसैट 3डीआर के अलावा तीन मौसम विज्ञान संबंधी सैटेलाइट हैं। ये हैं कल्पना 1, इनसैट 3ए और इनसैट 3डी। ये सभी बीते एक दशक से काम कर रहे हैं। 2022 में भारत की एक और उन्नत तकनीक का सैटेलाइट इनसैट-3डीएस भेजने की योजना है।
-कल्पना 1 और इनसैट 3 ए में फोटो भेजने की तकनीक है। यह बेहद साफ फोटो उपलब्ध कराते हैं। इनकी फोटो चार प्रकार की होती हैं, नियर-इंफ्रारेड, शॉर्टवेवे इंफ्रारेड, वाटर वेपर और थर्मल इंफ्रारेड बैंड्स।

किसे मिलेंगी सेवाएं
आईएनएसएटी-3डीआर तटरक्षक, भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण, जहाजरानी एवं रक्षा सेवाओं समेत अन्य संचालन सेवाओं को जानकारी मिलेगी।

3डी से बेहतर
इनसैट 3डीआर कुछ मामलों में इनसैट 3डी के समान जानकारी उपलब्ध कराएगा। इससे वायुमंडल में 70 किलोमीटर की ऊंचाई तक का तापमान, 15 किलोमीटर की ऊंचाई तक की आद्रर्ता और ओजोन परत की जानकारी मिलती है। ये सारी जानकारी इनसैट 3डीआर ज्यादा बेहतर, सटीक और जल्द उपलब्ध कराएगा।
– रात में, बादल और कोहरे की भी तस्वीरें ले सकेगा।
-दो थर्मल इंफ्रारेड बैंड के जरिए तस्वीरें लेगा।
-समुद्र की सतह पर तापमान का सटीक अध्ययन हो सकेगा।
-पहले भेजे गए मौसमविज्ञान से संबंधी मिशन की सेवा आगे बढ़ाएगा।
-धरती पर कुछ खोजने और किसी प्रकार की आपदा के समय बचाव अभियान में भी इसका प्रयोग किया जा सकेगा।

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2022 में उड़ान भरेगा इनसैट-3डीएस
इसरो का मौसम विज्ञान संबंधी अगला मिशन इनसैट-3डीएस है। यह 2022 में प्रक्षेपित किया जाएगा। यह मौसम के सटीक पूर्वानुमान में भारत को विश्व के अन्य देशों के मुकाबले खड़ा कर देगा।
35786 किलोमीटर की ऊंचाई पर चक्कर लगाएगा धरती के।
2060 किलोग्राम वजन, लॉन्चिंग के वक्त।
907 किलोग्राम का भार है मूल सैटेलाइट का।
1164 वॉट की ताकत है इनसैट 3डीआर में
10 साल तक काम करेगा इनसैट-3डीआर

अन्य देश काफी आगे
जापान: भूकंप की जानकारी के लिए सबसे उन्नत तकनीक। मिनट तक का सही आकलन करने में सक्षम। हालांकि इस पर यूरोपीय देश उठाते रहे हैं सवाल।
अमरीका: तूफान और चक्रवात की सटीक जानकारी देने वाला मौसम पूर्वानुमान सिस्टम। पूर्वी हिस्से में लगातार तूफानों के कारण रिसर्च पर बड़ा खर्च।
ऑस्ट्रेलिया: समुद्री हलचलों के अध्ययन में महारत। फिलहाल कई देशों को उपलब्ध कराता है जानकारी।
फ्रांस: तापमान और बारिश के सटीक पूर्वानुमान के लिए पहचान। सूचनाओं के जटिल विश्लेषण के साथ जल्द जानकारी देता है।