Tribals Mob Lynching: सिवनी हत्याकांड के विरोध में तेज हुई आदिवासी लामबंदी

Tribals Mob Lynching
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  • आदिवासी संगठनों का आरोप: धर्म के बहाने हो रही गुंडागर्दी
    आरोपियों पर कार्यवाही और असंवैधानिक समूहों पर प्रतिबंध की मांग
    कहा: आजाद भारत में आदिवासी घर में भी सुरक्षित नहीं यह शर्मनाक

भोपाल सिवनी। बीते शुक्रवार को मध्य प्रदेश के कई जिलों के आदिवासी संगठनों ने सिवनी में दो आदिवासियों की बर्बर हत्या (Tribals Mob Lynching) का विरोध करते हुए आरोपियों पर कार्यवाही की मांग की है। बड़वानी, खरगोन और बुरहानपुर जिले के विभिन्न आदिवासी संगठनों ने धर्म के बहाने आदिवासियों, दलितों एवं अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे हमलों का विरोध करते हुए इस प्रकार की असंवैधानिक गतिविधियों को अंजाम देने वाले समूहों पर प्रतिबंध की मांग भी की है।

Tribals Mob Lynching क्या है मामला
सिवनी में दो मई की देर रात हमले और मारपीट (Tribals Mob Lynching) के कारण, सिमरिया गाँव के धनसा इनवाती एवं सागर गाँव के सम्पत बट्टी की मृत्यु हो गई। मृतकों के परिवारजनों के अनुसार, देर रात को करीब दो-ढाई बजे, अचानक बजरंग दल के 15-20 लोग उनके घर में घुसे और उन्हें मारना शुरू कर दिया। बीच बचाव करने आई महिलाओं को भी मारा गया। उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। एक युवक, ब्रजेश बट्टी भी इस घटना में घायल हुआ है। सिवनी जिले के थाना कुरई के थाना प्रभारी ने भी आरोपियों में से 3 व्यक्ति बजरंग दल एवं 6 व्यक्ति श्रीराम सेना के सदस्य होने की पुष्टि की गई है।

आदिवासियों के अनुसार, धर्म और ‘गौरक्षा’ की आड़ में, आए दिन गुंडे आम जन पर हमला (Tribals Mob Lynching) कर रहे हैं। कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ा रहे हैं। उनका कहना रहा कि हम आदिवासी, अपने मवेशियों को घर के सदस्य जैसे रखते हैं, पर जिस तरह गाय के नाम पर इंसानों को मारा जा रहा है, उसका हम पुरजोर विरोध करते हैं। जिन लोगों ने कभी गाय पाली ही नहीं, उसकी देखबाल के बारे में कुछ नहीं जानते हैं, वे अपने आप को आज “गौ रक्षक” बता कर इन्सानों को मार रहे हैं। बच्चों के हाथ में कलम पकड़ाने की जगह, हथियार पकड़ाए जा रहे हैं।

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Tribals Mob Lynchingआदिवासियों पर हमले की पहली घटना नहीं
आदिवासियों पर इस प्रकार अत्याचार (Tribals Mob Lynching) की यह पहली घटना नहीं है। मध्य प्रदेश में लगातार इस प्रकार से आदिवासियों के साथ बर्बरतापूर्वक हमले जारी है।
खरगोन—खंडवा में दो मौत: सितंबर 2021 में बिस्टान (खरगोन) और ओंकारेश्वर (खंडवा) में पुलिस हिरासत में बिसन भील और किशन निहाल की मृत्यु हुई थी। न्यायिक जांच में दोषी पाये जाने के बाद भी आज तक एक भी दोषी पुलिस कर्मी गिरफ्तार नहीं हुआ है।
कोरकू परिवार की हत्या: मई 2021 में नेमवार में, अपने आप को “हिन्दू केसरिया संगठन” का नेता बताने वाले सुरेन्द्र राजपूत द्वारा एक पूरे कोरकू आदिवासी परिवार की हत्या की गई।
नीमच में मार मार कर हत्या: अगस्त 2021 को नीमच में एक गरीब आदिवासी मजदूर, कन्हैयालाल भील को सरे आम सड़क पर घसीटा गया और मार-मार कर उसकी हत्या की गई।

शासन प्रशासन की बड़ी विफलता
आदिवासी संगठनों की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि आजाद भारत में इस प्रकार आज भी भी आदिवासियों के घर में घुस कर आदिवासियों की हत्या की जा सकती है, यह शासन प्रशासन की बड़ी विफलता है। एकत्रित आदिवासियों के अनुसार, इस प्रकार के असंवैधानिक गतिविधियों पर रोक न लगाने के कारण ही इस प्रकार के मामले लगातार सामने आते जा रहे हैं।

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आदिवासियों ने बताया, कि आज आदिवासी एवं सभी समाज की मेहनतकश महिला-पुरुष आसमान छूती महंगाई, से जूझ रहे हैं। किसान कर्ज़ में डूबा है और उसे अपने फसलों का पूरा भाव नहीं मिल रहा है। किसान अब मजदूर बन रहा है, प्रदेश के मजदूर काम के खोज में गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक में बंधुआ मजदूर बन रहे हैं। शिक्षा व्यवस्था खत्म किया जा रहा है, अस्पतालों में इलाज नहीं मिल रहा है। शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के बजाए, आज लोग अपने घरों में भी सुरक्षित नहीं है।

गुंडागर्दी पर सख्त अंकुश की मांग
आदिवासियों द्वारा शासन प्रशासन से मांग की गई कि इस प्रकार की गुंडागर्दी पर सख्त अंकुश लगाएँ, एवं असंवैधानिक समूहों पर प्रतिबंध लगाते हुए, सभी नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों को सुनिश्चित किया जाए और सभी के इज्ज़त से जीने का हक कायम किया जाए। निमाड में अलग अलग जगहों पर हुए विरोध प्रदर्शन में जागृत आदिवासी दलित संगठन, जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस), आदिवासी छात्र संगठन, एससी-एसटी-ओबीसी एकता मंच, आदिवासी मुक्ति संगठन जैसे विभिन्न संगठन शामिल रहे।