एक युग के अंत की शुरुआत

जी हां! इसी को कहते हैं, युग का अंत  शुक्रवार 15 नवंबर 2013 को वानखेड़े स्टेडियम में अपनी आखिरी पारी खेलकर जाते सचिन तेंदुलकर। “युग का अंत” बीते दिनों का … Read More

फंतासी के धुंध के आगे की कवितायेँ

अमूमन ब्लॉग, फेसबुक आदि पर जो कविता लिखी जा रही है, उससे कभी कभी घिन आने लगती है। अभी कुछ दिन पहले मित्र संदीप पांडे ने भी इस संबंध में सवाल उठाया … Read More

ये इश्क नहीं आसां

एशियाई समाज अपनी विविधता के बावजूद जिस एक डोर से बंधा है, वह अदृश्य होते हुए भी गाहे-बगाहे उदाहरणों से सामने आती रहती है। दिलचस्प है कि हिना-बिलावल के अंतरंग … Read More

अपराध का रंग काला क्यों है?

काला पक्ष, कला का नहीं होता, अपराध का होता है। भाषाई दृष्टि से कला के बिल्कुल नजदीकी शब्द का अपराध से रिश्ता जोड़ना तब अटपटा नहीं लगता, जब पूरी दुनिया … Read More

भाषण से मैदान मारने की बेबसी

नवंबर में होने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति पद के चुनाव की गर्माहट के बीच गुरुवार को बराक ओबामा ने डेमोक्रेटिक पार्टी के सम्मेलन में अपना बहुचर्चित भाषण दिया। वे लगातार दूसरी … Read More

बंधक लोकतंत्र की याद

आपातकाल पर जनवाणी का विशेष पेज आपातकाल दु:स्वप्न था। उस दौर में आम आदमी से लेकर राजनीतिक और सरकार से लेकर लोकतंत्र ने बहुत कुछ खोया था। जनता और तानाशाही … Read More

संघर्षरत जनता का वैश्विक प्रतिनिधि

8 अक्तूबर 1967 को 17 छापामारों और बोलिविया की सैन्य टुकड़ी के बीच घमासान लड़ाई हुई। चे गंभीर रूप से घायल हो गए। बंदी बना लिए गए। कमांडर पराडो सालमन … Read More

शिक्षा का सामाजिक रूपक

भारतीय समाज में कामयाबी को उत्साही ढंग से मनाने का रिवाज रहा है। हाल ही में आए सीबीएसई और विभिन्न बोर्ड्स के नतीजों में भी यह पारंपरिक उत्साह कम नहीं … Read More