Freedom to Marry

Freedom to Marry: अपनी मर्जी से शादी और धर्मांतरण के लिए स्वतंत्र हैं सभी बालिग: हाई कोर्ट

कोलकाता। कोलकाता हाई कोर्ट  ने कहा है कि कोई भी बालिग़ व्यक्ति अपनी मर्ज़ी से अपना जीवनसाथी (Freedom to Marry) चुन सकता है, धर्म परिवर्तन कर सकता है और इच्छा न हो तो अपने माता-पिता के पास आने से मना कर सकता है। हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी सोमवार को एक हिंदु पिता की अपील पर सुनवाई के दौरान की। पिता का कहना है कि उसकी बेटी ने मुस्लिम युवक से शादी के लिए धर्म परिवर्तन किया है।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार जस्टिस संजीब बनर्जी और जस्टिस अरिजीत बनर्जी की खंडपीठ ने सोमवार को कहा कि इस तरह अगर कोई बालिग़ व्यक्ति अपनी इच्छानुसार शादी करता है और अपने पिता के पास वापस लौटने से मना कर देता है तो कोर्ट इस मामले में हस्तक्षेप नहीं कर सकता।

अख़बार के मुताबिक हाई कोर्ट नाडिया जिले के दुर्गापुर गांव में रहने वाले एक व्यक्ति के मामले की सुनवाई कर रही थी। व्यक्ति का कहना था कि उनकी 19 साल की बेटी 15 सितंबर को घर से झूठ बोलकर चली गई है और दूसरे दिन पता चला कि उसने धर्म बदल कर शादी कर ली है।

व्यक्ति ने आरोप लगाया है कि उनकी बेटी का जबरन धर्म परिवर्तन करवाया गया हो सकता है और इस मामले में उससे ज़बर्दस्ती झूठी गवाही दिलवाई गई हो सकती है।

पिता की वकील सुस्मिता साहा दत्ता ने कहा कि फरियादी की बेटी घर से बैंक जाने की बात कहकर निकली थीं, लेकिन जब वह नहीं लौटी तो मुरुतिया पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई, जिसमें अपहरण होने का अंदेशा जताया गया था।

अपनी याचिका में, पिता ने दावा किया कि उसे संदेह नहीं कि उसकी शादी विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के तहत औपचारिक रूप से हुई थी, जो अंतर-धार्मिक विवाह का प्रावधान है। लेकिन उसने अपना धर्म बदलने के 24 घंटे के भीतर शादी कर ली।

हालांकि पुलिस ने कोर्ट से कहा कि लड़की ने कहा है कि उसने अपनी मर्ज़ी से शादी की है और वो अपने पिता के पास वापस नहीं जाना चाहती।