आज से नवरात्रि शुरू: नौ दिन, नौ प्रतीक

1 अक्टूबर 2016 को राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित

सचिन श्रीवास्तव
भारतीय धार्मिक चरित्रों की एक बड़ी खासियत यह है कि वे अपने पूर्ण रूप में मानव कल्याण और दुनिया की बेहतरी का संदेश देते हैं। साथ ही उनके रूप, रंग, गुण और उनसे जुड़ी चीजें भी इंसानी जीवन को संवारने के प्रतीकों और संकेतों से भरी हैं। दैवीय रूपों में दिखाई गई हर चीज का अध्यात्मिक महत्व तो है ही इनका व्यावहारिक महत्व भी है। कई बार हम भक्ति में इन छोटे-छोटे संकेतों और प्रतीकों को नजरअंदाज कर देते हैं। शक्ति की उपासना के नौ दिनी महोत्सव की शुरुआत पर मां दुर्गा से जुड़े प्रतीकों पर एक नजर…

1. शंख: अनसुनी ध्वनि का रखें ध्यान
मां दुर्गा के हाथ का शंख ध्वनि का प्रतीक है। यह ध्वनि शक्ति, संहार और चेतावनी की ध्वनि है। जब हम अपने आराध्य की पूजा करते हैं तो यह ध्वनियां हमें मिलती रहती हैं, लेकिन हम इन्हें अनसुना कर देते हैं। साल में नौ दिन की पूजा अवधि के दौरान इन ध्वनियों को सुनना जरूरी है, जो हमारे अंतर्मन से भी निकलती हैं और बाहरी दुनिया से संकेतों के जरिये मिलती हैं। आराधना के जरिये हम इन ध्वनियों को ज्यादा बारीकी से सुन सकते हैं।

2. त्रिनेत्र: इच्छा, कार्यशीलता और ज्ञान
भगवान शिव की तरह मां दुर्गा की भी तीन आंखें हैं। इसीलिए उन्हें त्रिअम्बिके कहा जाता है। इन तीन नेत्रों में से बायीं आंख चंद्रमा यानी इच्छा की प्रतीक है। दायीं आंख सूर्य यानी कार्यशीलता को दर्शाती है, जबकि माथे पर तीसरी आंख आग यानी ज्ञान की प्रतीक है। इन तीनों का मिश्रित संदेश है कि आप इच्छा रखें, अपनी इच्छा को पूरा करने के लिए सतत् क्रियाशील रहें और इसके लिए ज्ञान हासिल करते रहें।

3. कमल: विश्वास का प्रतीक
मां दुर्गा के हाथ में अधखिला कमल विश्वास का प्रतीक है कि कार्य में सफलता ही उसकी अंतिम परिणति है। अधखिला कमल पूर्ण आकार लेगा यह उसकी नियति है, लेकिन यह निश्चित नहीं है। सफलता का पूरा कमल खिले, यह सुनिश्चित करने के लिए प्रयासों की भी जरूरत है। कीचड़ में खिलने वाला कमल इस बात का भी प्रतीक है कि बुरी से बुरी परिस्थितियों के बीच से खुशियां खिल उठती हैं।

यह भी पढ़ें:  गणेश चतुर्थी: प्रतीक और उनसे मिलने वाली अनूठी शिक्षाएं

4. शेर: साहस, शौर्य और संतुलन 
जंगल का राजा शेर ताकत के साथ साहस, संतुलन और शौर्य का प्रतीक है। शेर चाहे तो एक साथ कई जानवरों का खात्मा कर सकता है, लेकिन इससे संतुलन बिगड़ जाएगा। जितनी जरूरत है, उतना ही इस्तेमाल करने से ही संतुलन कायम रहता है। यह संदेश सिंहवाहिनी मां दुर्गा अपनी सवारी के जरिये देती हैं। असीमित ताकत का अर्थ संतुलन बिगाडऩे की आजादी नहीं है, बल्कि इससे दूसरों के प्रति जिम्मेदारी भी बढ़ती है।

5. हाथ: आठ कोण और दस दिशाएं
दुर्गा के विभिन्न रूपों में उनके आठ और कुछ में दस हाथ दर्शाए गए हैं। यह आठ कोणों और दस दिशाओं के प्रतीक हैं। आशय यह कि मां रूपी दुर्गा आठ कोणों और दसों दिशाओं से हमारी रक्षा करती हैं। व्यावहारिक संकेत यह भी है कि वे हमें सभी ओर से सुरक्षित रहने और हर कोने पर नजर रखने की ताकीद करती हैं। यह हमारी कमजोरियों से लेकर समस्याओं तक के लिए हैं। यानी हमें अपने आसपास की हर जानकारी होनी चाहिए।

6. हथियार: हर लड़ाई के लिए तैयार
अमूमन हमारे धार्मिक चरित्रों के हाथ में एक या अधिक से अधिक दो हथियार ही होते हैं, लेकिन शक्ति की प्रतीक दुर्गा धनुष, तलवार, त्रिशूल आदि हथियारों से लैस हैं। वे अलग-अलग दुश्मन के खिलाफ अलग-अलग अस्त्र-शस्त्र का इस्तेमाल करती हैं। यह जीवन में विभिन्न किस्म के शत्रुओं और उनके लिए विशिष्ट हथियार का प्रतीक है। आम कहावत है कि अदरक हर मर्ज की दवा नहीं है। यही दुर्गा जी का संदेश है, जैसी समस्या, वैसा हल।

यह भी पढ़ें:  माल्या की वापसी: नामुमकिन तो नहीं, लेकिन मुश्किल बहुत

7. वज्र: अडिगता का सूचक
विभिन्न हथियारों के साथ वज्र भी मां दुर्गा के हाथ में मौजूद है। यह उनकी अडिगता का सूचक है। किसी काम में जुटने के बाद उसे अधूरा नहीं छोडऩा है। दुर्गा के ब्रह्मचारिणी रूप का संदेश भी यही है। वज्र अपने सामने आने वाली हर चीज को तोड़ डालता है। यह मजबूत इरादे का प्रतीक है। लक्ष्य की राह में आने वाली हर बाधा को तोडऩे का अदम्य साहस और इरादा ही इस हथियार का प्रतीक है।

8. चक्र: सतत् सक्रियता का दर्शन
मां दुर्गा के दाहिने हाथ की तर्जनी में सुदर्शन चक्र हमेशा घूमता रहता है। यह बुराई के विनाश का अचूक शस्त्र है। साथ ही बुराई के खिलाफ लगातार सक्रियता प्रतीक है। यानी बुराई का खात्मा कर चुप नहीं बैठ जाना है, बल्कि उसके खिलाफ हमेशा सक्रिय रहना चाहिए। यह सक्रियता हर स्तर पर जरूरी है। यह भी माना जाता है कि चक्र इसका भी प्रतीक है कि दुनिया में कोई घटना मां दुर्गा की इच्छा के खिलाफ नहीं घटित नहीं होती।

9. रूप: जीवन के विविध आयाम

मां दुर्गा के नौ रूप हैं और उन्हें 108 नामों से पुकारा जाता है। यह नौ रूप जीवन के विभिन्न हिस्सों को दर्शाते हैं। शैलपुत्री का पारिवारिक दायित्व और पति के प्रति निष्ठा हो या ब्रह्मचारिणी का विराट तप, सभी रूपों में मां दुर्गा जीवन की विभिन्न भूमिकाओं के तैयार रहने का संदेश देती हैं। वे शक्ति का रूप हैं, तो सौम्यता और वात्सल्य का भी प्रतीक हैं। जगतजननी नाम से साफ है कि यह पूरी कायनात ही उनका रूप है।