सेलिब्रेशन आॅफ जर्नलिज्म: वाटरगेट कांड से डूबे निक्सन

11 जुलाई 2016 के राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित
सचिन श्रीवास्तव
वाटरगेट कांड अमरीकी राजनीति में सत्ता के दुरुपयोग, भ्रष्टाचार और तमाम अनैतिक हरकतों का खुलासा था। वाशिंगटन पोस्ट के दो नौजवान पत्रकारों ने यह भंडाफोड़ किया था। अमरीकी जासूसी एजेंसी एफबीआई के एक अफसर ने इनकी मदद की थी। इस खुलासे के बाद तमाम कोशिशों के बावजूद निक्सन बच नहीं सके और उन्हें राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देना पड़ा था। 
चोरी से खुला मामला
राष्ट्रपति चुनाव अभियान के शुरुआती दिनों में डेमोक्रेटिक पार्टी के वाटरगेट भवन में स्थित कार्यालय में पांच लोग सेंध लगाते पकड़े गए। मामला संघीय जांच ब्यूरो को सौंपा गया । पता चला निक्सन के स्टाफ ने उन्हें भेजा था। वाशिंगटन पोस्ट के दो संवाददाताओं ने इसकी खोजबीन शुरू की।
मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट 
पत्रकारों की खोजबीन में निक्सन की संलिप्तता का खुलासा हुआ। इसके बाद जांच समितियां बनीं, निक्सन और उनके स्टाफ ने सफाइयां पेश कीं, लेकिन नित नए खुलासों के बाद काफी सबूूत जमा हो गए। 24 जुलाई 1974 को मामला अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। सुनवाइयां शुरू हुुईं, और आए दिन नए राज खुलने लगे। 
वाटरगेट के हीरो
बॉब वुडवर्ड : बॉब का जन्म 26 मार्च 1974 को अमेरिका में हुआ था। उन्होंने 1971 में रिपोर्टर के रूप में वाशिंगटन पोस्ट ज्वॉइन किया था। 
कार्ल बर्नस्टाइन : कार्ल बर्नस्टाइन ने वाशिंगटन पोस्ट 1972 में ज्वॉइन किया था। इनका जन्म 14 फरवरी 1944 को हुआ था।
डीप थ्रोट का रहस्य
बॉब और कार्ल की खबर का सूत्र डीप थ्रोट था। पहले वॉशिंगटन पोस्ट ने डीप थ्रोट की पहचान उजागर करने से इंकार कर दिया। दशकों तक इस पर पर्दा ही पड़ा रहा। 2005 में पूर्व एफबीआई एजेंट मार्क फेल्ट ने स्वीकार किया कि वे ही डीप थ्रोट नाम के सूत्र थे। उन्होंने लिखा, “मैं ही वो व्यक्ति हूं, जिसे डीप थ्रोट कहते थे।”
दर्जनों अफसर हुए बर्खास्त
अदालत में एक गवाह ने बताया कि निक्सन के इशारे पर विरोधियों के फोन टेप किये जाते थे। काफी दबाव के बाद टेप सुप्रीम कोर्ट में पेश गए तो उनमें से बहुत से हिस्से हटा दिए गए थेे। मामला दबाने के लिए ह्वाइटहाउस के दर्जन भर सर्वोच्च अधिकारियों को बर्खास्त किया गया। 1 मार्च 1974 को निक्सन के करीबी सहयोगी रहे सात अफसर जिन्हें वाटरगेट सेवन के नाम से जाना जाता है, को दोषी पाया गया। आखिर बढ़ते दबाव के बाद निक्सन ने 8 अगस्त 1974 को दूसरा कार्यकाल पूरा किए बिना ही इस्तीफा दे दिया। 
राष्ट्रपति की साजिश 
17 जून 1972: राष्ट्रपति चुनाव के दौरान एक सेंधमारी में मामला सामने आया। इसके बाद हुई खोजबीन से पता चला कि राष्ट्रपति निक्सन अपने विरोधियों की जासूसी करवा रहे थे। इस मामले में धीरे-धीरे कई लोग सामने आते गए। मामला संघीय जांच ब्यूरो को सौंपा गया और समितियां बनीं। 
19 जून 1972: एक जीओपी सुरक्षा सहायक भी गिरफ्तार जासूसों में शामिल था। पूर्व अटार्नी जनरल जॉन माइकल और निक्सन के चुनाव प्रचार प्रमुख ने निक्सन के इस जासूसी कांड से किसी भी प्रकार के संबंध से इंकार किया।
10 अक्टूबर 1972: वाशिंगटन पोस्ट के अनुसार, एक एफबीआई एजेंट ने बताया कि वाटरगेट में निक्सन को दोबारा चुनने के लिए बड़े पैमाने पर जासूसी कराई जा रही थीं।
11 नवंबर 1972: निक्सन दोबारा राष्ट्रपति बने। उन्हें 60 फीसदी से ज्यादा वोट मिले।
24 जुलाई 1974: सारे सबूतों के साथ मामला अमरीकी सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
8 अगस्त 1974: रिचर्ड निक्सन ने राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया। 
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